एक सप्ताह बाद मिलेगी रोहतांग टनल से आने-जाने की अनुमति

कुल्लू: कुल्लू-मनाली में फंसे लाहौल के हजारों लोगों के लिए हवाई सेवा की एकमात्र सहारा बनी हुई है. लाहुल स्पीति प्रशासन ने लोगों की दिक्कत को देखते हुए हालांकि कोकसर और मढ़ी में नौ-नौ सदस्यों की रेस्क्यू टीम स्थापित कर दी है, लेकिन पैदल सफर करने वाले राहगीरों के लिए जोखिम कम नहीं हुआ है.

बीआरओ ने 30 किमी दूर चुंबक मोड़ के समीप दस्तक दे दी है, लेकिन लाहौल की ओर से बीआरओ की गति धीमी होने से सफर लंबा और जोखिम भरा है.लाहौल की चंद्रा घाटी के लिये फिर भी राहें आसान नहीं हैं लेकिन केलांग और पटन वैली से आने वाले लोगों को लंबा सफर तय करना पड़ रहा है. कोकसर में 7 फीट मोटी बर्फ के ऊपर सेवाएं देने को रेस्क्यू टीम तैयार है लेकिन राहगीर कदमताल करने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं.

सर्दियों में भारी बर्फबारी होने से इस बार रोहतांग दर्रे में बर्फ के पहाड़ खड़े हैं. एक सप्ताह बाद रोहतांग सुरंग से आने-जाने की अनुमति देने की बात बीआरओ ने कही है, लेकिन लाहौल की ओर रोहतांग टनल के नार्थ पोर्टल में हिमखंड गिरने से राहगीरों की राहें आसान नही दिख रही हैं.

इस प्वाइंट पर गत दिनों हिमखंड गिरनेसे बर्फ सुरंग के अंदर आ गया था. दूसरी ओर अभी हुफ होटल से दालंग मैदान तक के 24 किमी के रास्ते में 4 से 7 फीट बर्फ मोटी परत और सड़क पर हिमखंड गिरने से राहगीरों के लिए कठिनाई पैदा हो रही है.

लाहौल के युवाओं का कहना है कि उनके पास हवाई सेवा ही एकमात्र विकल्प है. अब वे भी पैदल रोहतांग लांघने की तैयारी में हैं. उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से अधिक उड़ाने की अपील की है.

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