प्रयागराज में हुआ माघ मेले का शुभारम्भ

प्रयागराज, कड़ाके की ठंड पर आस्था भारी है। जी हां, माघ मेला के पहले स्नान पर्व पौष पूर्णिमा पर आज यानी शुक्रवार को यही नजर आ रहा है। इसी स्नान पर्व के साथ संगम नगरी में एक माह का कल्पवास भी आज ही से शुरू हो गया है। यूं तो गुरुवार की आधी रात से ही स्नान का क्रम शुरू हो गया है, लेकिन सुबह से भीड़ अधिक हो गई है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु ट्रेनों, बसों और अपने निजी वाहनों से माघ मेला की ओर जा रहे हैं। सभी मन में आस्था और होठों पर गंगा मइया का नाम है। जबकि ठंड इतनी की पूछिए मत। शीतलहर चल रही है और आसमान पर बादल भी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सभी कल्पवासियों को अपनी मंगलकामनाएं दी हैं। वहीं मेला प्रशासन का दावा है कि सुबह 10 बजे तक लगभग 15 लाख 50 हजार श्रद्धालुओं ने पवित्र त्रिवेणी में पुण्य की डुबकी लगाई। मेला में सुरक्षा की दृष्टि से भारी संख्या में पुलिस और पीएसी के साथ अद्र्ध सैनिक बल तैनात हैैं। मंडलायुक्त और डीएम भी कई मजिस्ट्रेटों के साथ मेला में डटे रहे।

25 सौ बीघा क्षेत्रफल में बसाई गई है तंबुओं की आध्यात्मिक नगरी

साधु-संतों, कल्पवासियों के लिए संगम तट पर मीहने भर के जप, तप, ध्यान के लिए करीब 25 सौ बीघा क्षेत्रफल में तंबुओं की आध्यात्मिक नगरी बसाई गई है। इसका भव्य स्वरूप भी दिखाई पड़ रहा है। लाखों श्रद्धालुओं ने पौष पूर्णिमा पर संगम और गंगा के विभिन्न घाटों पर पुण्य की डुबकी लगाएंगे। स्नान का सिलसिला भोर पहर से शुरू होकर दोपहर बाद तक चलेगा। इसी के साथ एक माह का जप, तप, स्नान, ध्यान और दान का कल्पवास शुरू हो जाएगा। पुलिस और प्रशासन की ओर से स्नान के लिए प्रबंध किए गए हैैं।

आधी-अधूरी तैयारियों के साथ माघ मेला शुरू, अब भी 25 से 30 फीसद काम पूरा

देश भर से संगम नगरी आने वाले श्रद्धालुओं, साधु-संतों और कल्पवासियों को माघ मास का पहला पौष पूर्णिमा स्नान आधी-अधूरी तैयारियों के बीच ही करना पड़ रहा है। शुक्रवार से कल्पवास शुरू हो गया है, फिर भी एक माह के सबसे बड़े जनसमागम की तैयारियां अभी पूरी नहीं हो सकी है। अब भी 25 से 30 फीसद काम पूरा नहीं हो सका है। इसमें सबसे ज्यादा जल निगम और स्वास्थ्य विभाग का काम शेष है। लोक निर्माण विभाग भी नए बसाए गए क्षेत्रों में चकर्ड प्लेटों में क्लैैंपिंग का काम पूरी नहीं कर सका है। इसके अलावा विद्युत, सिंचाई, नगर निगम, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के काम भी बाकी हैैं।

05 पांटूनों पुल गंगा नदी पर बनाए गए हैैं आवागमन के लिए

– 16 स्नान घाट बनाए गए हैैं श्रद्धालुओं के स्नान के लिए

– 13 हजार एलईडी फिटिंग लगाई गई हैैं मेला क्षेत्र में

– 350 किमी की विद्युत लाइन का बिछाया गया है जाल

– 90 किमी की मेला क्षेत्र में बनाई गईं हैैं चकर्ड प्लेट की सड़कें

– 22 अस्थायी विद्युत उपकेंद्र बनाए गए हैैं बिजली की आपूर्ति को

कई क्षेत्रों में अव्यवस्था का आलम है

फिलहाल अब भी तैयारियां पूरी नहीं हो सकी हैैं। जबकि प्रशासन ने विभागों को सभी काम पूरे करने की आखिरी तारीख 15 दिसंबर 2019 से बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दिया था। कई क्षेत्रों में अव्यवस्था का आलम है। झूंसी क्षेत्र में कई स्थानों पर अभी काम पूरी नहीं हो सका है। सेक्टर तीन, चार और पांच में अभी 40 फीसद से ज्यादा काम शेष हैं। सबसे ज्यादा स्थिति सेक्टर पांच की खराब है। यहां बाद में विकसित किए गए क्षेत्र में अब भी जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है।

शौचालयों का निर्माण कार्य भी अभी पूरी नहीं हो सका है

इसके अलावा शौचालयों का निर्माण कार्य भी अभी पूरी नहीं हो सका है। इसके कारण श्रद्धालुओं के साथ ही कल्पवासियों को भी खुले में शौच जाना पड़ रहा है। अफसरों का कहना है कि खराब मौसम ने तैयारियों में खलल डाल दिया। इस व्यवधान के कारण ही काफी काम पीछे हो गए। दरअसल, बारिश के कारण दलदली जमीन फिर से कीचडय़ुक्त हो गई। मेलाधिकारी रजनीश कुमार मिश्र ने बताया कि ज्यादातर काम पूरा हो चुका था, लेकिन बारिश ने पानी फेर दिया।

सुविधाओं को परेशान कल्पवासी

मेला क्षेत्र में एक माह के कल्पवास के लिए अब भी कल्पवासी व संस्थाओं के संचालक सुविधाओं के लिए परेशान हैैं। गुरुवार को भी बड़ी संख्या में कल्पवासी और उनके स्वजन माघमेला प्रशासन कार्यालय पर डटे रहे। अपर मेलाधिकारी जितेंद्र पाल ने कई आवेदन निपटाए, मगर शाम तक दफ्तर में लोगों की भीड़ जुटी रही। बताते हैैं कि जमीन तो दे दी गई मगर सुविधा पर्ची में अब भी देरी हो रही है।

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