बहुरेंगे शहर की सड़कों के दिन

आगरा,  आगरा शहर में 33 करोड़ रुपये से जर्जर रोड और नालियां बनेंगी। यह कार्य निगम के चार जोन में होगा। यह निर्णय शुक्रवार दोपहर 14 वें वित्त आयोग की बैठक में लिया गया। नगर निगम की कार्यकारिणी कक्ष में मेयर नवीन जैन की अध्यक्षता में बैठक हुई जिसमें 39 करोड़ के प्रस्ताव रखे गए लेकिन 33 करोड़ के प्रस्ताव पास किए गए। 72 लाख रुपये से घटिया चौराहा से पालीवाल पार्क चौराहा तक रोड का निर्माण होगा। हरीपर्वत जोन में 56, ताजगंज में 30, लोहामंडी में 42, छत्ता में 39 निर्माण कार्य शामिल हैं। डीएम पीएन सिंह, नगरायुक्त अरुण प्रकाश, एडीए उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह, अपर नगरायुक्त केबी सिंह, मुख्य अभियंता, विद्युत संजय कटियार सहित अन्य उपस्थित रहे।

बारिश के बाद एक बार फिर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक सरकारी लापरवाही और कागजों में किए गए कार्य की कलई खुल गई है। स्मार्ट बन रहे शहर में सड़कों पर गहरे गड्ढों से वाहन जूझ रहे हैं, उनमें जलभराव हादसों का कारण बन रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में और भी बुरा हाल है। जिले की कुल 6746 किलोमीटर सड़क को गड्ढ़ा मुक्त बनाने के लिए 8.51 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इस धनराशि के साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ का प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने का आदेश भी गड्ढे में चला गया है। यहां 52 फीसद सड़कें गड्ढ़ा युक्त हैं, जिनमें से शहरी क्षेत्र में 38 और ग्रामीण क्षेत्र में 66 फीसद हैं।

सीएम ने 31 दिसंबर 2019 तक सूबे की सड़कों को गड्ढ़ा मुक्त करने के आदेश दिए थे, लेकिन नगर निगम, एडीए, लोनिवि व एनएचएआई ने आदेशों को हवा में उड़ा दिया। सड़क के गड्ढों, उखड़ी बजरी, जलभराव के कारण राहगीर रोज चोटिल होते हैं। शहर में अधिकतर मार्ग पर लोगों को गड्ढ़ों से जूझना होता है, कुछ का तो इतना बुरा हाल है कि रोज हादसे होते हैं।

बदहाल सड़कों में सबसे पहले अवधपुरी क्षेत्र ही आता है। यहां तो गड्ढों में सड़क है। रोज छोटे वाहन फिसलकर गिरते हैं और बड़े वाहन क्षतिग्रस्त होते हैं। वायु विहार से कलवारी की ओर जाने वाले रास्ते में गहरे गड्ढे हैं, पिछले दिनों हादसे में एक मौत हो गई थी। आवास विकास के तो सभी सेक्टरों में गड्ढों की भरमार है। सेक्टर-4, सेक्टर-10 में बुरा हाल है। गुरुद्वारा गुरु का ताल फ्लाई ओवर से उतरकर बोदला की ओर जाने वाले मार्ग का बुरा हाल है। पूरी सड़क पर गड्ढों की भरमार है। गुरुद्वारा गुरु का ताल फ्लाई ओवर से मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की ओर आने और जाने वाली सड़क भी बदहाल है। गहरे गड्ढों के साथ ही कई स्थानों पर सड़क टूटने से रोड़ी निकल आई है। इससे दोपहिया वाहन फिसलते हैं। आरबीएस कॉलेज के सामने होकर खंदारी की ओर जाने वाली सड़क में गहरे गड्ढे हैं। मंडी सईद खां, सेंट जोंस से बेलनगंज तिकोनियां की ओर जाने वाला रास्ता भी गड्ढ़ों से भरा है। केके नगर से पीपी नगर तक, उर्खरा रोड, देवरी रोड, कालिंदी बिहार, एमजी रोड से नामनेर, छीपीटोला से बालूगंज, पंचकुईंया से शाहगंज, प्रतापनगर क्षेत्र और उससे मारुति स्टेट जाने वाला रास्ता आदि क्षेत्र बदहाल हैं। इनमें गहरे गड्ढे हैं।

– सड़कों के निर्माण में जलनिकासी के लिए प्रॉपर ड्रेनेज सिस्टम नहीं बनाया गया है। बारिश में पानी भर जाता है। इससे मिट्टी का कटान होता है। सड़क धंस जाती है।

– सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। आइआरसी (इंडियन सड़क कांग्रेस) के मानकों के अनुसार सड़क निर्माण के समय स्थान की मिट्टी की जांच, बिटुमिन गिट्टियों की जांच होनी चाहिए। ऐसा नहीं किया जाता है। एक ड्रम बिटुमिन से आधा दर्जन ड्रम कोलतार बना लिया जाता है। उसे सड़क निर्माण में प्रयोग किया जाता है।

-आइआरसी ने सड़क निर्माण के समय उसकी मोटाई के मानक निर्धारित किए हैं, लेकिन उनका ध्यान नहीं रखा जाता है। मानक के अनुसार मोटाई 50 मिमी तक होनी चाहिए। सड़क की कैपेसिटी के हिसाब से मोटाई निर्धारित की जाती है।

– सड़क पर जलभराव होने से तारकोल गिट्टियों से पकड़ छोडऩे लगता है। इसके चलते गड्ढे हो जाते हैं। सड़क गुणवत्ता की जांच के लिए पहले लोक निर्माण विभाग की टीम उस स्थान का औचक निरीक्षण करती है। इसके बाद वहां पर गड्ढा खोदकर सैंपल लिया जाता है। पूरे मटेरियल मिक्सर की लैब में जांच की जाती है। ये प्रक्रिया इतनी लम्बी होती है कि महीनों गुजर जाते हैं, लेकिन रिपोर्ट नहीं आती। न ही मामले में दोषियों पर कार्रवाई हो पाती।

-नियमानुसार सड़क निर्माण के दौरान बिना सैंपल जांच के भुगतान नहीं किया जा सकता है, लेकिन सब कागजों पर चल रहा है। बिना सड़क सैंपल की गुणवत्ता की जांच किए ही निर्माणदायी एजेंसियों को भुगतान कर दिया जाता है।

गड्ढ़ों से रोज शहर के नौ लाख दोपहिया वाहन और दो लाख, तीन एवं चार पहिया वाहनों को जूझना पड़ता है। ऑटोमोबाइल इंजीनियर और मिस्त्रियों के अनुसार वाहनों की लाइफ 20 से 30 फीसद तक कम हो रही है।

नगर निगम ने सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए 50 लाख रुपये खर्च किए हैं। पांच नगर पालिका, सात नगर पंचायत ने गड्ढ़ा मुक्ति के लिए 1.25 करोड़ खर्च किए। जिला पंचायत ने 32 लाख रुपये, क्षेत्र पंचायत ने 1.5 करोड़, ग्राम पंचायत ने 1.75 करोड़, लोक निर्माण विभाग ने 3.19 करोड़ रुपये गड्ढे भरने में लगाए। इस धनराशि से 1023 किलोमीटर सड़कों के गड्ढे भरने थे, जिसमें से 380 किलोमीटर गड्ढा मुक्ति का दावा भी किया गया।

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