सोनभद्र में फर्जी परमिट पर हो रहा खनन का कारोबार

सोनभद्र। जिले में एक बार फिर से अवैध परमिट का खेल अपने चरम पर पहुंच गया है। अवैध खनन के बोल्डर व बालू का पड़ोसी राज्य के परमिट पर जिले में परिवहन किया जा रहा है। इस खेल में विभागीय अधिकारियों से लेकर कई सफेदपोश शामिल हैं। प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक बालू व गिट्टी पड़ोसी राज्य के परमिट के सहारे पार कराया जा रहा है। खनन बैरियर पर स्थाई निगरानी का न होना भी इस गोरखधंधे का प्रमुख वजह है। जनपद में अवैध खनन का कार्य एक बार फिर से फलने-फूलने लगा है। हो भी क्यों न इस माल को आसानी से छत्तीसगढ़ व एमपी के परमिट पर वैध करके पूर्वांचल के बाजारों में भेजा जा रहा है। ऐसा नहीं है कि इस खेल की जानकारी संबंधित विभाग के पास नहीं है, बावजूद इसके विभागीय चुप्पी इस पर आमजन को खलने लगी है। इस गोरखधंधे के कारण हर माह करोड़ों रुपये के राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। महंगा परमिट बन रहा वजह :

उत्तर प्रदेश में खनिज परिवहन के लिए मिलने वाला एमएम 11 पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश की तुलना में महंगा होता है। इसके अलावा जिले में वर्तमान समय में एक दर्जन से भी कम संख्या में पत्थर की खदानें संचालित हो रही हैं। खदान मालिकों को ही एमएम 11 आवंटित होता है, इसके सापेक्ष जिले में 200 से अधिक संख्या में क्रशर प्लांट प्रतिदिन गिट्टी उगल रही है। इन गिट्टियों को बाजार में भेजने के लिए एमएम 11 की आवश्यकता पड़ती है। फुटकर बाजार में स्थानीय एमएम 11 के ऊंचे दाम के कारण कई लोग पड़ोसी जिले के एमएम 11 को इन क्रशर प्लांटों पर आपूर्ति कर उसका परिवहन कराते हैं। प्रतिदिन निकलते हैं 400 से 500 ट्रक :

नाम न छापने की शर्त पर खनिज विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि इस समय जनपद से गिट्टी व बालू लदे 400 से 500 ट्रक प्रतिदिन पूर्वांचल के विभिन्न बाजारों के निकलते हैं। इसके सापेक्ष अगर विभाग से परमिट निकासी की जानकारी मांग ली जाए तो वह नहीं दे पाएंगे। बताया कि अधिकांश गाड़ियों पर पड़ोसी राज्य का परमिट लगाकर उन्हें वैध किया जाता है, अगर वह कहीं चेकिग में पकड़ जाते हैं तो उनका टका सा जवाब रहता है कि वह पड़ोसी राज्य से गिट्टी व बालू लादकर ला रहे हैं, जबकि यह सामान जिले का ही रहता है। विभागीय जांच में ही खुलती है पोल :

ऐसा नहीं है कि इस खेल की जानकारी विभागीय अधिकारियों को नहीं रहती। कई बार विभागीय जांच में ही स्कैन व बाहर के परमिट के प्रयोग का मामला खुलता रहा है। शुक्रवार को ही खनन व परिवहन विभाग की संयुक्त जांच में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, बावजूद इस पर कड़ाई से पालन नहीं किया जा रहा। दैनिक जागरण ने इस गोरखधंधे को कई बार प्रमुखता से प्रकाशित किया है। जिसके क्रम में समय-समय पर विभागीय कार्रवाई भी हुई, बावजूद इसके स्थायी रोकथाम पर आजतक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। गिट्टी की क्वालिटी से होती है पहचान :

ऐसे मामले आ रहे हैं। इसके लिए जांच टीम बनाई जा रही है। इसके अलावा जो ट्रक बाहर की परमिट से गिट्टी का परिवहन करते हैं उसकी जांच होती है, बाहर की गिट्टी व स्थानीय गिट्टी की पहचान आसानी से हो जाती है। अगर स्थानीय गिट्टी लदे होते हैं और परमिट बाहर का होता है तो उन पर कार्रवाई होती है। इसके अलावा इस पर स्थाई रोकथाम के लिए जल्द ही कठोर कदम उठाए जाएंगे।

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