मोदी सरकार के 8 साल पूरे, महंगाई से बेरोजगारी तक कैसा रहा प्रदर्शन

केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को आठ साल पूरे हो गए हैं. उन्होंने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी. एनडीए सरकार के पिछले आठ सालों में भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को लेकर काफी चर्चा हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद “सबका साथ, सबका विकास” के लक्ष्य पर काफी जोर दिया है. हालांकि, पिछले आठ सालों में आर्थिक विकास मिलाजुला रहा है. पूरी दुनिया में कोरोना महामारी और फिर यूरोप में युद्ध के कारण भारत की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है.

अर्थशास्त्रियों और एक्सपर्ट्स का कहना है कि महामारी से पहले ही, नोटबंदी, GST इम्प्लीमेंटेशन और बैड लोन की समस्या ने भारत के इकनॉमिक ग्रोथ को प्रभावित करना शुरू कर दिया था. पिछले कुछ समय में रूस यूक्रेन युद्ध के चलते भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर हुआ है, जिसके चलते भारत के ट्रिलियन डॉलर इकनॉमी बनने के सपने को बड़ा झटका लगा है. यहां हमने ग्राफ की मदद से यह बताया है कि मौजूदा सरकार ने 2014 से अब तक जीडीपी ग्रोथ, कंज्यूमर इन्फ्लेशन और बेरोजगारी दर के मामले में कैसा प्रदर्शन किया है.

GDP ग्रोथ   

पिछले आठ सालों में भारत की रियल ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) ग्रोथ का प्रदर्शन मिलाजुला रहा है. ग्राफ के मुताबिक, 2014 से 2016 तक भारतीय अर्थव्यवस्था औसतन ऊपर की ओर बढ़ रही थी. हालांकि, इसके बाद अगले दो वर्षों में जीडीपी ग्रोथ फिसल गई. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के एग्रिकल्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कमजोरी के चलते विकास दर धीमी हो गई. NBFC सेक्टर में संकट, GST की शुरूआत और नोटबंदी के कारण साल 2019 में जीडीपी दर में 3.7 फीसदी की और गिरावट आई.

2020 में कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया. इसके चलते भारत की विकास दर चार दशकों में पहली बार नेगेटिव में चली गई. हालांकि, पिछले दो सालों में भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार होता दिख रहा है. इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के अनुसार, 2021 में 8.9 प्रतिशत के जीडीपी ग्रोथ का अनुमान था. वहीं, 2022 में इसके 8.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. IMF और वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत का प्रदर्शन बेहतर होगा.

महंगाई

महंगाई की बात करें तो सरकार ने रिजर्व बैंक को महंगाई दर 2 से 6 फीसदी के दायरे में रखने का लक्ष्य दिया हुआ है. जब मोदी जी ने साल 2014 में सत्ता संभाली, तब CPI इन्फ्लेशन औसतन 5.8 प्रतिशत था. कच्चे तेल की कम कीमतों के चलते साल 2014 से 2019 तक महंगाई RBI के दायरे में रही. हालांकि, कोरोना महामारी के बाद 2020 में इसने 6 फीसदी का आंकड़ा पार कर लिया. 2020 में एवरेज कंज्यूमर इन्फ्लेशन 6.2 प्रतिशत था.

साल 2021 में महंगाई कम होकर 5.5 फीसदी पर आ गई. लेकिन यह लगातार तीसरा महीना है जब रिटेल इन्फ्लेशन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संतोषजनक स्तर से ऊपर बना हुआ है. महंगाई सरकार के साथ-साथ आरबीआई के लिए भी एक बड़ी चिंता की बात है क्योंकि यूक्रेन में युद्ध के अभी तक कम होने या खत्म होने के संकेत नहीं मिले हैं.

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बेरोजगारी दर

मोदी सरकार के सत्ता में आने से लेकर साल 2017 तक बेरोजगारी दर औसतन 5.4 प्रतिशत पर रही. इसके बाद, 2018 और 2019 में बेरोजगारी मामूली रूप से गिरकर 5.3 प्रतिशत हो गई. लेकिन कोरोना महामारी के पहले साल 2020 में बेरोजगारी बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई. वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार, बेरोजगारी दर 2021 में 6 प्रतिशत के स्तर पर थी. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, भारत की लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 2016 में 47 प्रतिशत से गिरकर 40 प्रतिशत हो गई.

(written by Aakriti Bhalla)

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