कांग्रेस और एनसीपी के अस्तित्व की लड़ाई पर करप्शन की आंच

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद बीजेपी-शिवसेना के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. देर सबेर या तो गठबंधन हो जाएगा या फिर साल 2014 की तरह ही दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ने का भी फैसला कर सकते हैं. मौजूदा राजनीतिक हालात में  विकल्प दोनों ही पार्टियों ने खुले रखे हैं और किसी बड़े फैसले का ऐलान हो सकता है. लेकिन महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी इस लड़ाई में आखिर कब वापसी करेंगे? दोनों के लिए ही इस बार का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव अस्तित्व का सवाल बन गया है.

अभी तक कांग्रेस-एनसीपी में उसके कद्दावर नेताओं के पार्टी छोड़कर जाने की वजह से हड़कम्प मचा हुआ था तो करप्शन की आंच ने सूबे की सियासत को गरमा दिया है. महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में एनसीपी प्रमुख शरद पवार और उनके भतीजे अजीत पवार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है.  एनसीपी चीफ शरद पवार ने कहा है कि, ‘अगर किसी ने मुझे जेल भेजने की योजना बनाई है, तो मैं इसका स्वागत करता हूं.’

पहले किले में सेंध तो अब कारागार में राजा और मंत्री को डालने की तैयारी. शरद पवार ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक दुर्भावना से ग्रस्त बता कर सरकार पर आरोप लगा सकते हैं क्योंकि अक्टूबर में विधानसभा चुनाव हैं. भ्रष्टाचार के मामले में सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठा कर ‘विक्टिम कार्ड’ खेला जा सकता है. लेकिन भ्रष्टाचार के उन आरोपों पर एनसीपी और कांग्रेस का क्या जवाब होगा जो कि चुनाव से पहले नहीं बल्कि उनकी सरकारों के कार्यकाल में हुए?

एनसीपी नेता छगन भुजबल मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दो साल जेल में काटकर ज़मानत पर रिहा हुए हैं. छगन भुजबल पर महाराष्ट्र में एनसीपी-कांग्रेस की सरकार के दौरान पीडब्ल्यूडी मंत्री रहने के दौरान भारी भ्रष्टाचार का आरोप है.

पूर्व उप मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार पर करोड़ों रुपये के सिंचाई घोटाले का आरोप है. करीब 70 हज़ार करोड़ रुपये के घोटाले के लिए महाराष्ट्र की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो( ACB) ने एनसीपी नेता अजित पवार को जिम्मेदार ठहराया था.

महाराष्ट्र में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण पर भी आदर्श हाउसिंग घोटाले का आरोप लगा था. हालांकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ सीबीआई को कार्रवाई करने के राज्यपाल के आदेश को खारिज कर दिया. लेकिन आदर्श हाउसिंग घोटाले की वजह से ही उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी थी.

ऐसे में एक बार फिर महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी करप्शन के मुद्दे पर चुनाव-प्रचार के वक्त घिरेगी. जहां एक तरफ बीजेपी अनुच्छेद 370 और तीन तलाक खत्म करने को मुद्दा बनाएगी तो वो करप्शन के मुद्दे प कार्रवाई को लेकर पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम और पूर्व उप-मुख्यमंत्री छगन भुजबल की नज़ीर देगी तो अब ईडी की जांच की आंच में आए चाचा-भतीजे पर भी हमला करेगी.

लोकसभा चुनाव में मिली हार से अबतक कांग्रेस-एनसीपी उबर नहीं सकी हैं. महाराष्ट्र में पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं ने पार्टी की कमर तोड़ने का काम किया है. एक अविश्वास और भ्रम के माहौल में दोनों पार्टियां फिलहाल हैं. कोई किसी पर भरोसा नहीं कर पा रहा है. भले ही दोनों ने 125-125 सीटों का बंटवारा किया है लेकिन ऐसे समय में टिकट देने के लिए सही उम्मीदवारों का चयन शक की भेंट चढ़ जाता है.

दोनों ही पार्टियां पहली दफे राज्य में ऐसी स्थिति से गुज़र रही हैं कि उनके पास जिताऊ उम्मीदवार और मुद्दे नहीं हैं. यहां तक की कई बड़े नेता चुनाव लड़ने से भी कतरा रहे हैं.  वहीं कांग्रेस और एनसीपी की कमज़ोरी का फायदा बीजेपी-शिवसेना उठाने में जुटी हुई हैं. दोनों ही पार्टियों में कांग्रेस-एनसपी के नेताओं को शरण मिल रही है. ऐसे में कांग्रेस-एनसीपी शायद ही किसी चमत्कार की उम्मीद कर सकते हैं क्योंकि सत्ता छोड़ने पांच साल बाद भी दोनों पार्टियों का करप्शन के आरोपों ने पीछा नहीं छोड़ा है.

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