उत्‍तराखंड में आधी से ज्यादा सिंचाई की हाईड्रम योजनाएं हैं बंद

एक तरफ खेती-किसानों को बढ़ावा देने पर सरकारें जोर दे रही हैं और दूसरी ओर सिंचाई के लिए पानी ही उपलब्ध नहीं है। उत्तराखंड का सूरतेहाल कुछ ऐसा ही है। खासकर, हाईड्रम योजनाओं के मामले में। यहां वर्तमान में 520 हाईड्रम योजनाओं में से 274 बंद पड़ी हैं। जो संचालित हैं, वे भी बस जैसे-तैसे चल रही हैं। उस पर तुर्रा ये कि पर्वतीय क्षेत्रों में खेतों तक पानी पहुंचाने वाली इन योजनाओं के लिए बजट की भारी कमी है। इसे देखते हुए राज्य सरकार अब इन योजनाओं के लिए राज्य सेक्टर से भी बजट देने पर विचार कर रही है। अभी तक जिला योजना के तहत हाईड्रम योजनाओं के लिए बजट दिए जाने का प्रावधान है।

खेती के लिए सिंचाई सबसे महत्वपूर्ण है। सिंचित क्षेत्रों में फसलों की उत्पादकता असिंचित क्षेत्रों की तुलना में लगभग दोगुना से अधिक रहती है। सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से किसान वक्त से खेती करते हैं और उन फसलों को उत्पादित करते हैं, जिनकी बाजार में मांग ज्यादा है। साफ है कि उत्पादन में बढ़ोतरी से कृषकों की आय में भी वृद्धि होती है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए ही पूर्व में पर्वतीय क्षेत्र के ऊंचाई वाले स्थानों तक खेतों में पानी पहुंचाने को हाईड्रम योजनाओं की शुरुआत की गई। इसके जरिये किसी भी नदी अथवा स्रोत से पानी अपलिफ्ट कर खेतों तक पहुंचाया जाता है।

अविभाजित उप्र के दौर से ही हाईड्रम योजनाओं की शुरुआत की गई और धीरे- धीरे राज्यभर में इनकी संख्या 673 पहुंच गई। इस बीच देखरेख के अभाव, बजट की कमी समेत अन्य कारणों से तमाम योजनाएं बेकार होती चली गईं। वर्तमान में 153 योजनाओं को बेकार घोषित किया जा चुका है। यही नहीं, शेष रह गईं 520 योजनाओं में से भी वर्तमान में केवल 246 से ही सिंचाई की सुविधा जैसे-तैसे मिल रही है। नतीजतन बंद पड़ी 274 हाईड्रम योजनाओं से सेवित क्षेत्रों में किसानों के माथों पर बल पड़े हैं। हाल में हुए विधानसभा सत्र के दौरान विधायकों ने हाईड्रम योजनाओं के बंद होने से खेती पर पड़ रहे असर का मसला उठाया था।

मरम्मत को नाममात्र का बजट

हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर जिलों को छोड़कर राज्य के शेष 11 जिलों में सिंचाई के लिए हाईड्रम योजनाएं हैं, मगर इनकी मरम्मत एवं रखरखाव को जिला योजना से नाममात्र का बजट ही लघु सिंचाई विभाग को मिल पाता है। चालू वित्तीय वर्ष की स्थिति देखें 246 चालू योजनाओं के लिए महज 2.97 करोड़ की राशि का ही प्रावधान किया गया है।

1487 लाख के बजट की है जरूरत

राज्य में बंद पड़ी 274 हाईड्रम योजनाओं को चालू करने की दिशा में बजट का रोड़ा सामने आ रहा है। बताया गया कि इन योजनाओं को चालू करने के लिए 1487 लाख की राशि की जरूरत है।

बोले मंत्री

सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि सिंचाई की हाईड्रम योजनाओं की मरम्मत एवं रखरखाव के लिए जिला योजना में जिला नियोजन एवं अनुश्रवण समिति द्वारा जिलों में बजट प्रावधान अनुमोदित किया जाता है। अब हम इन योजनाओं के लिए राज्य सेक्टर से भी बजट देने पर विचार कर रहे हैं। इसके अलावा बंद योजनाओं को चालू करने के मद्देनजर तमाम विकल्पों पर भी मंथन चल रहा है।

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