नीरव मोदी के पतन की वजह नीलम ?

कल तक नीरव मोदी और मेहुल चोक्सी हीरे का पर्याय हुआ करते थे, आज उन्ही हीरों ने उन्हें और उनकी आसमान सी इज़्ज़त को कोयला बना दिया। ऐश्वर्य और समृद्धि का प्रतीक रत्न हीरा एक पारदर्शी रत्न है। रासायनिक रूप से समझें तो नाज़ुक दिल को लूटने वाला हीरा, सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है, जो कार्बन का शुद्धतम रूप है। हीरा रासायनिक तौर पर बहुत निष्क्रिय होता है और अघुलनशील होता है। हीरे को दैत्यगुरु शुक्र का रत्न माना जाता है। दैत्य भौतिकता और विलासिता के प्रतीक हैं। भौतिक समृद्धि क्षणभंगुर यानि शीघ्र नष्ट हो जाने वाली प्रवृत्ति है। विष्णु पुराण के अनुसार दैत्य कश्यप ऋषि और दिति के पुत्र और देव कश्यप ऋषि की दूसरी पत्नी अदिति के पुत्र थे। लिहाज़ा देव और दैत्य आपस में सौतेले भाई थे। देवों की प्रवृतियां राजसिक और सात्विक थीं। दैत्यों की प्रवृत्तियां तामसिक और भौतिक।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली में शुक्र यदि षष्ठ, अष्टम या द्वादश भाव में हो तो हीरा अर्श से फ़र्श पर फेंक देता है। भाग्य, कर्म और लाभ भाव के साथ स्वघर का शुक्र होने पर हीरा क़िस्मत चमका देता है। यूँ तो हीरे को शुक्र का रत्न होने की वजह से प्रेम का रत्न भी माना जाता है, पर कड़वी सच्चाई तो ये है कि शुक्रदेव का रत्न हीरा शनिदेव के रत्न नीलम की तरह ही ऐसा रत्न है, जो यदि रास न आए तो धूल में भी मिला देता है। कभी विश्व का नूर माना जाने वाला कोहिनूर तो अपनी अपनी बेनूरियत और अशुभता के लिए विश्वविख्यात है। कोहिनूर ने पहले दिल लूटा, और बाद में दिल वाले को सदा के लिए लूट लिया। वो जहाँ जहाँ गया, हुकूमत को ज़मींदोज़ करता गया।

सिर्फ़ कोहिनूर ही नहीं, ऐसे हीरों की लंबी फ़ेहरिस्त है, जिन्हें हासिल करने के लिए न जाने कितना ख़ून बहाया गया, और जिसने जिसने उन्हें हासिल किया, धूल धुसरित होता गया। शाहजहां के काल में 787 कैरेट का सबसे बड़ा हीरा ‘ग्रेट मुगल’ गोलकुंडा की खान से 1650 में निकला था, जो कोहिनूर से करीब छह गुना ज़्यादा बड़ा था, वो शाहजहां ही नहीं, मुग़लिया सल्तनत के ताबूत की वो कील बन गया, जिसने शाहजहां को जेल में सड़ने के लिए विवश कर दिया। ऐसा ही एक बहुमूल्य हीरा था, अहमदाबाद डायमंड। जो बाबर ने 1526 में पानीपत की लड़ाई के बाद ग्वालियर के राजा विक्रमजीत को हराकर हासिल किया था। जिसके कुछ वक़्त के बाद 1530 में ही बाबर की मौत हो गयी। द रिजेंट नाम का 410 कैरेट का हीरा 1702 के आसपास गोलकुंडा की खान से निकला था। जो कालांतर में एक तिहाई यानि 140 कैरेट का होकर 1812 में विश्व विजेता नेपोलियन के पास पहुँचा। और दुनिया को जीतने वाला नेपोलियन 1815 में वाटरलू के युद्ध में ख़ाक हो गया।

सिर्फ़ हीरा नहीं हीरा हीरों के व्यापारियों की कथा भी बहुत हसीन नहीं है।एक ज़माने में फ़िल्मों के सबसे बड़े फ़ाइनैन्सर माने जाने वाले भरतशाह, जो अपने समय के हीरों के प्रख्यात व्यापारी थे, उन्हें लम्बे समय तक जेल में रहना पड़ा।एक और हीरा व्यापारी, दिनेश गांधी, ये भी फ़िल्मों के बड़े फ़ाइनैन्सर थे, इनकी जल कर मौत हो गयी थी। कल तक हीरे के 57 पहलुओं की तरह चमचमाने वाले आज के दौर के दो बड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी और मेहुल चोक्सी की कोयले जैसी दास्तान तो हर किसी की ज़ुबान पर है ही।

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