एनजीटी ने कहा कि सरकार ने बीते दो वर्षों में गंगा की स्वच्छता के उपर सात हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं, इसके बावजूद यह एक संवेदनशील पर्यावरणीय मुद्दा बना हुआ है। एनजीटी ने कहा कि जब तक प्रदेश सरकार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का चिह्नीकरण और गंगा के आसपास स्वीकृत और अस्वीकृति गतिविधियों के बारे में कोई निर्णय नहीं लेती, तब तक हरिद्वार (उत्तराखंड) से उन्नाव (उत्तर प्रदेश) तक गंगा नदी के दोनों किनारों से 100 मीटर तक निर्माण प्रतिबंधित रहेगा। इसके साथ ही गंगा व सहायक नदी के बाढ़ संभावित क्षेत्रों में पालिकाओं के कचरे, जैविक कचरे पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

एनजीटी ने गंगा में मशीन से खनन पर दिए गए अपने आदेश को दोहराते हुए कहा कि नदी में मशीन से खनन की अनुमति नहीं है। नदी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में भी हल्के उपकरण यदि संभव हो तो हाथ से ही खनन किया जा चाहिए।

चारधाम परियोजना पर नहीं कोई रोक

अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने कहा है कि एनजीटी ने चारधाम परियोजना के कार्यों पर कोई रोक नहीं लगाई है। यह योजना सुचारू रूप से चल रही है। उन्होंने अपर महाधिवक्ता उत्तराखंड राहुल वर्मा के पत्र का हवाला देते हुए बताया कि चारधाम परियोजना के कार्य पर रोक के संबंध में जो बातें कहीं जा रही हैं वह गलत हैं। इस संबंध में अगली सुनवाई 20 मार्च को होनी है।