अब डीएम देंगे निजी नाप भूमि पर खनन पट्टे

देहरादून। खनन से आमदनी बढ़ाने को लेकर हाथ-पांव मार रही राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश के निजी नाप भूमि में खनन या चुगान के पट्टाधारकों को राहत दी है। राज्य मंत्रिमंडल ने फैसला लिया है कि ऐसी नाप भूमि में खनन के लिए टेंडर नहीं कराने होंगे। साथ में पट्टाधारकों को खनन की अनुमति शासन के बजाए जिलाधिकारी के स्तर से मिल जाएगी। पट्टाधारकों के लिए खनन की प्रक्रिया सरल बना दी गई है।

मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड उपखनिज (परिहार)(संशोधन) नियमावली, 2019 के तहत में संशोधन कर निजी नाप भूमि के खनन पट्टाधारकों को ई-नीलामी, टेंडर से निजात देने का निर्णय लिया। इन खनन पट्टाधारकों को खनन के लिए अब शासन से मंजूरी नहीं लेनी होगी। यह कार्य जिलाधिकारी को सौंपा गया है। निजी नाप भूमि में चुगान की अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने का निर्णय लिया गया, अलबत्ता पहले से स्वीकृत पट्टे स्वीकृत अवधि तक चलते रहेंगे।

वर्तमान में राज्य में बालू, बजरी व बोल्डर यानी आरबीएम की कुल मांग करीब 15-16 करोड़ मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है। अब निजी नाप भूमि में भूस्वामियों की सहमति प्राप्त आवेदकों को जिलाधिकारी स्तर पर आवेदन करना होगा। मंत्रिमंडल के इस फैसले से आगामी वर्षों में ऑल वेदर रोड, भारत माला प्रोजेक्ट, रेल विकास निगम व महाकुंभ से संबंधित परियोजनाओं के लिए निर्बाध रूप से आरबीएम उपलब्ध होगा। साथ में स्टोन क्रशर या स्क्रीनिंग प्लांट के आवेदनकर्ताओं को भी खनन पट्टा मिल सकेगा। काबीना मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि इस फैसले से खनन से 780 करोड़ राजस्व प्राप्ति के लक्ष्य को पाने में मदद मिलेगी।

 

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