अखिलेश जल्द करेंगे सपा में शिवपाल की घर वापसी

इसकी शुरुआत प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) ने की. मैनपुरी में उन्होंने कहा कि उनकी तरफ से सुलह की पूरी गुंजाइश है. इसके बाद अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने भी घर वापसी पर स्वागत की बात कही.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) विधानसभा चुनाव (Assembly Election) से ठीक पहले यादव परिवार और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) में मचे घमासान के बाद अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) के बीच सुलह की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं. लेकिन पहली बार यह संकेत मिल रहे हैं कि दोनों के बीच करीब तीन साल से चली आ रही तनातनी सुलझ सकती है. इसकी शुरुआत प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने की. मैनपुरी में उन्होंने कहा कि उनकी तरफ से सुलह की पूरी गुंजाइश है. इसके बाद अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि शिवपाल का घर में स्वागत है. अगर वे आते हैं तो उन्हें पार्टी में आंखें बंद कर शामिल करूंगा.

ऐसे में दोनों तरफ से आए इन बयानों को यूपी की सियासत और यादव परिवार के लिए अहम माना जा रहा है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो अखिलेश और शिवपाल के बयान दोनों के बीच जमी कड़वाहट की बर्फ के पिघलने के संकेत दे रहे हैं. कहा जा रहा है कि सपा नेता रामगोविंद चौधरी द्वारा शिवपाल यादव की सदस्यता रद्द करने की याचिका के बाद एक बार फिर से सुलह की कोशिश हुई है. यह भी माना जा रहा है कि अगर बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ती है तो अखिलेश, शिवपाल की सदस्यता रद्द करने वाली याचिका भी वापस ले सकते हैं.

2016 में शुरू हुई तनातनी
बता दें यूपी विधानसभा चुनाव से पहले 2016 में यादव परिवार में महाभारत की शुरुआत हुई. बात इतनी बढ़ी की अखिलेश ने समाजवादी पार्टी पर एकाधिकार कर लिया. उसके बाद चुनाव में समाजवादी पार्टी के हार के बाद शिवपाल ने बयानबाजी शुरू कर दी. जिसके बाद उन्होंने समाजवादी मोर्चे का गठन किया और फिर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) का गठन किया. इस बीच अखिलेश और शिवपाल के बीच सुलह की कई कोशिशें हुईं, लेकिन सभी नाकाम साबित हुईं.

लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद बढ़ी कड़वाहट
हालांकि अलग पार्टी बनाने के बाद शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच दूरियां लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद और बढ़ गईं. बताया जाता है कि समाजवादी पार्टी की हार के बाद हुई समीक्षा में शिवपाल की भूमिका को भी अहम माना गया. शिवपाल की पार्टी ने चुनाव में सपा के खिलाफ भी प्रत्याशी उतारे. वह खुद भी फिरोजाबाद से चुनाव लड़े. हालांकि वे खुद जीत तो नहीं सके लेकिन उन्होंने भतीजे अक्षय की हार में अहम भूमिका निभाई. इतना ही नहीं यादव परिवार के गढ़ कन्नौज और बदायूं में भी हार के पीछे शिवपाल का अलग होना प्रमुख वजह रही.

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