“सेनाका वीररत्ना” है क्रिकेट के धर्मराज एवं DRS के जनक

(कोलम्बो: वर्षा ठाकुर, संवाददाता ) क्रिकेट को जेंटलमैन्स गेम भी कहा जाता है। अंग्रेजों का यह खेल न केवल ब्रिटेन बल्कि भारतवर्ष के साथ सम्पूर्ण दक्षिण एशिया में काफी प्रचलित है। क्रिकेट अनेक वजहों से विवादों में भी रहा है तथा समय समय पर इसको सुधारने के प्रयास भी हुए हैं। क्रिकेट में अम्पायरों के गलत निर्णय अपने उलट-फेरों के कारण अक्सर चर्चा में रहे हैं।  इसकी वजह से काफ़ी बार सिर फुटव्वल की नौबत भी आ चुकी है। इस समस्या का हल ICC को मिला अंपायर डिसीजन रिव्यू सिस्टम (UDRS या DRS) में जो कि प्लेयर रेफरल प्रणाली के रूप में जानी जाती है ।  यह एक टेक्नोलॉजी आधारित प्रणाली है जिसका उपयोग क्रिकेट में मैच अधिकारियों को उनके निर्णय लेने में सहायता करने के लिए किया जाता है।
श्री लंका के सेनाका वीररत्ना को UDRS या DRS के जनक के रूप में जाना जाता है । श्री वीररत्ना पेशे से वकील हैं जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया और श्री लंका में काम किया है।   25 मार्च 1997 को ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय समाचार पत्र में प्रकाशित एक पत्र में क्रिकेट के लिए एक खिलाड़ी रेफरल प्रणाली का सुझाव देने वाले सेनाका वीररत्ना पहले व्यक्ति थे। धर्म और न्याय के महत्त को क्रिकेट में लाने वाले श्री वीररत्ना  द्वारा  लाये गए UDRS या DRS के माध्यम से ऑन-फील्ड अंपायर तीसरे अंपायर  के साथ परामर्श करने का विकल्प चुन सकते हैं। यह सुविधा खिलाडियों को भी उपलब्ध है और वह अनुरोध कर सकते हैं कि तीसरा अंपायर ऑन-फील्ड अंपायरों के फैसले पर विचार करे जिसे प्लेयर रिव्यू के रूप में जाना जाता है।
UDRS या DRS को ऑन-फील्ड अंपायरों द्वारा किए गए विवादास्पद फैसलों की समीक्षा के उद्देश्य से पेश किया गया था कि क्या बल्लेबाज को आउट किया गया था या नहीं। प्लेयर रेफरल प्रणाली का परीक्षण पहली बार भारत बनाम श्रीलंका मैच में 2008 में किया गया था, और आधिकारिक तौर पर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी/ ICC ) द्वारा 24  नवंबर 2009  को पहली बार के दौरान लॉन्च किया गया था। डुनेडिन में यूनिवर्सिटी ओवल में न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के बीच टेस्ट। पहली बार इसका उपयोग जनवरी 2011 में इंग्लैंड के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान वन डे इंटरनेशनल (ODI) में किया गया था।
यह श्री लंका ही नहीं बल्कि समस्त एशिया और अफ्रीका के लिए सम्मान का विषय है कि क्रिकेट में न्याय की भावना को मूलधारा में लाने का काम सेनाका वीररत्ना जैसे विकासशील देश के व्यक्ति ने किया है।  चूँकि भारत समय समय पर अंतर्राष्ट्रीय पटल पर विकासशील देशों की आवाज़ रहा है और उसने न्याय के लिए लड़ने वाले नेल्सन मंडेला और अन्य कई व्यक्तियों का सम्मान किया है, इसलिए भारत में अपने पडोसी देश श्री लंका के योगदान को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
ध्यान से देखने पर ज्ञात हो ही जाता है कि सेनाका वीररत्ना के UDRS या DRS के पीछे धर्म, न्याय और सत्यमेव जयते की भावना ही है जो अनंत काल से भारत और श्री लंका की रग रग में दौड़ रही है। समय आ गया है कि धर्म, न्याय और सत्यमेव जयते के मानवीय मूल्य विश्व और मानव कल्याण के लिए समस्त विश्व में फैले।
मोदी सरकार ने समस्त विश्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत की जो कि अत्यंत सफल रही।  खेल और उस से जुड़े लोगों का सम्मान भी सफल विदेश नीति का द्योतक है। भारत का क्रिकेट में अग्रणीय देश के रूप में सेनाका वीररत्ना और उनके योगदान का  सम्मान न केवल भारत का विश्व क्रिकेट में नेतृत्व मजबूत करेगा बल्कि भारत के साथ श्री लंका के सम्बन्धो को और प्रगाढ़ करेगा।  अतः भारतीय विदेश मंत्रालय को इस विषय का संज्ञान लेने की तुरंत आवश्यता है ताकि कोलोंबो स्थित भारतीय उच्चायुक्त को उचित कार्यवाही के लिए निर्देशित किया जा सके।

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