देहरादून में अनाधिकृत रूप से चल रहे हैं कई पैथोलॉजी लैब

देहरादून, आप किसी पैथोलॉजी में टेस्ट इसलिए करवाते हैं क्योंकि उसकी रिपोर्ट पर आपका भरोसा होता है और उसी रिपोर्ट के आधार पर आपका इलाज होता है। लेकिन अगर टेस्ट में कोताही बरती जाए तो आपकी रिपोर्ट गड़बड़ भी हो सकती और आपका इलाज भी।

शहर की गली-गली में कुकुरमुत्ते की तरह पैथोलॉजी केंद्र खुल गए हैं। यह लैब खुलेआम मानकों की अनदेखी कर रहे हैं। स्थिति ये कि इनमें मिनिमम स्टेंडर्ड तक का पालन नहीं किया जा रहा है। स्पष्ट निर्देश हैं कि बिना विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैथोलॉजी जांच केंद्र नहीं चलेंगे। पर कई जगह लैब टेक्नीशियन ही लैब खोलकर जांच कर रहे हैं, जिसकी पैथोलॉजिस्ट एसोसिएशन हाल ही में स्वास्थ्य महानिदेशक से शिकायत भी कर चुका है। पर ताज्जुब देखिए कि अधिकारी फिर भी मुंह फेरे बैठे हैं। करीब दो माह पूर्व एक अभियान चला, पर कुछ दिन बाद ही बंद पड़ गया। साफ है कि आम जन को स्वास्थ्य विभाग ने उनके हाल पर छोड़ दिया है।

अगर आप खून की जांच करा रहे हैं, तो रिपोर्ट लेने से पहले यह तस्दीक कर लें कि लैब में पैथोलॉजिस्ट है या नहीं। कहीं जुगाड़ की व्यवस्था से तो जांच रिपोर्ट नहीं दी जा रही है। शहर में तमाम ऐसे पैथोलॉजी सेंटर चल रहे हैं, जहां पर पैथोलॉजिस्ट नहीं है, बस उनका नाम चल रहा है। सरकारी मानकों को पूरा करने के लिए डिग्रीधारी नामों का सहारा लिया गया है।

हाल के वर्षों में प्राइवेट लैब का धंधा तेजी से बढ़ा है। इसकी वजह यह बताई जाती है कि जांच करने के लिए चाइना मेड उपकरण आने लग गए। ये काफी सस्ते होते हैं। बमुश्किल 3-4 लाख रुपए खर्च करके सेल काउंटर और शुगर जैसी जांचों की मशीनें कोई भी खरीद रहा है। लैब के रजिस्ट्रेशन की कोई व्यवस्था नहीं है, ऐसे में सरकारी तंत्र का निजी लैब संचालकों पर कोई डर भी नहीं है।

कई बार डॉक्टर के हिसाब से लक्षण कुछ दिखते हैं और रिपोर्ट कुछ और आती है। ऐसे में दो से तीन बार जांच करानी पड़ती है। रिपोर्ट में आने वाले अंतर के पीछे बड़ी वजह सैंपल कलेक्शन में लापरवाही है। इसे लेकर खुद पैथोलॉजिस्ट एसोसिएशन भी सवाल उठा चुकी है। यह ताकीद की है कि पंजीकृत पैथोलॉजी से ही जांच कराएं। ज्यादातर पैथोलॉजी सेंटर में आटोमेटेड मशीनें आ गई हैं। सैंपल का सही समय पर इन तक पहुंचना जरूरी होता है। जानकार बताते हैं कि सही रिपोर्ट के लिए ब्लड सैंपल को दो घंटे में जांच मशीन में लगा देना चाहिए। यदि इससे अधिक वक्त लग रहा है तो तापमान सामान्य रहना चाहिए, लेकिन चार घंटे के बाद सैंपल की जांच करने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होना तय है।

पैथोलॉजिस्ट एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. सविता नेही ने बताया कि शहर में कई निजी लैब अनाधिकृत रूप से चल रहे हैं। पैथोलॉजी एसोसिएशन के अंतर्गत 46 रजिस्टर्ड पैथोलॉजिस्ट हैं। वहीं, शहर में दर्जनों पैथोलॉजी लैब खुल गए हैं। स्थिति ये कि एक पैथोलॉजिस्ट के नाम पर कई-कई लैब चल रहे हैं। इन लैब में न क्वालिटी और न शुल्क पर नियंत्रण है। एक पैथोलॉजिस्ट को अधिकतम दो लैब में सेवा देने की बाध्यता होनी चाहिए। हमने इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग को ज्ञापन भी दिया है।

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