चिमनियों का धुआं घोंट रहा है हवा का दम

मेरठ, शहर से कुछ दूर गांवों में धुआं उगलती चिमनियां। गन्ने के कोल्हू से निकलता काला धुआं। बीच बाजार कूड़ा और प्लास्टिक कचरा जलाने की हरकत और खामोश क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड। इन वजहों से प्रदूषण पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है। नतीजा यह है कि सुधार के बावजूद हवा मानक से दोगुनी विषाक्त मिली।

मंगलवार को मवाना रोड पर इंचौली के आसपास आसमान काला धुआं देखकर हर कोई हैरान था। सड़क से आते-जाते लोगों ने भी वाहन धीमे कर उद्योगों की उदासीनता पर तंज कसा। इंचौली और मसूरी के बीच स्थित खरदौनी के पास आम के बाग के पीछे एक कोल्हू में चार चिमनियों से गहरा काला धुआं निकलता मिला। आसपास के लोगों ने बताया कि यहां रोजमर्रा हवा प्रदूषित की जाती है। वैज्ञानिकों की मानें तो इस धुएं में बेशुमार मात्र में कार्बन मोनोआक्साइड, कार्बन डाई आक्साइड, पॉलिथीन व टायर जलाने से खतरनाक गैसों का उत्सर्जन होता है।

इसी से दो किमी गंगानगर की ओर सड़क के पास संचालित बड़ी औद्योगिक इकाई की चिमनी धुआं उगल रही है। हालांकि क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दावा करता है कि औद्योगिक इकाइयों से प्रदूषण का उत्सर्जन बंद है। थोड़ी दूर गंगानगर की ओर चलने पर पेपरमिल की चिमनी शांत मिली, लेकिन गंगानगर बाजार में धुआं ही धुआं नजर आया। सड़क के किनारे कूड़ा जलाने की वजह से आसपास से आने वालों को कुछ दिखाई तक नहीं पड़ रहा था। पॉलिथीन, पत्तल, व कचरा जलने से आसपास दरुगध फैली हुई थी।

मवाना रोड स्थित यशोदा कुंज कॉलोनी के सामने कूड़े के ढेर में मंगलवार को किसी ने आग लगा दी। रात तक कूड़े से निकले प्रदूषित धुएं से लोग परेशान रहे। शाम के वक्त कॉलोनीवासियों को अपना गेट व खिड़की मजबूरन बंद करनी पडी।

यशोदा कुंज कॉलोनीवासी विजयवीर, डा. अशोक त्यागी, कपिल चौधरी, डा. सुबोध पंवार, एससी गर्ग व मनीष सिरोही ने बताया कि आसपास के लोग व विवाह मंडप के कर्मचारी कॉलोनी के मुख्य गेट के सामने कूड़ा लाकर फेंक देते हैं। मंगलवार दोपहर किसी ने उसमें आग लगा दी। कूड़े के धुएं से लोग परेशान हो गए। शाम तक कॉलोनी के आसपास बुरी तरह से धुआं फैल गया। दरुगध भरे धुएं से बचने के लिए लोगों ने घरों के दरवाजे व खिड़की बंद कर ली। रात तक धुंआ निकलने से लोग घरों में कैद रहे।

मेरठ के तीनों प्रदूषण मापक केंद्रों का रिकार्ड तकरीबन एक जैसा मिला। गंगानगर में रात नौ बजे एक्यूआइ 229, जयभीमनगर में 255 व पल्लवपुरम में 253 मिला। हालांकि रात आठ बजे पीएम 2.5 की मात्र आश्चर्यजनक रूप से 45 माइक्रोग्राम दर्ज हुई। जयभीमनगर में 74 व पल्लवपुरम में 75 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज हुई। पीएम 10 की मात्र में भी सुधार हुआ, जबकि पड़ोसी जिलों में सुधार के बावजूद स्थिति खतरनाक रही।

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