गौरेया पक्षी के अस्तित्व पर मंडरा रहा संकट

घरों के आसपास रहने वाली गौरैया अब दिखाई नहीं देती. इस छोटे से खूबसूरत पक्षी का कभी इंसान के घरों में बसेरा हुआ करता था. लेकिन अब स्थिति बदल गई है. गौरैया के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. कहीं-कहीं तो अब ये बिल्कुल भी दिखाई नहीं देती.  विलुप्त होती गौरैया के बारे में जब पक्षी विशेषज्ञ से बात की तो उन्होंने चौंकाने वाले खुलासे किए.

घरों के आसपास सभी ने गौरेया को देखा होगा. लेकिन अब ये घरों के आसपास बामुश्किल ही दिखाई देती है. आलम ये है कि गौरेया विलुप्त हो रही प्रजातियों की सूची में आ गई है. दिन-प्रतिदिन हमारे जीवन से दूर होती गौरेया को लेकर  पक्षी विशेषज्ञ प्रो. दिनेश भट्ट से बात की और जानने का प्रयास किया कि आखिर क्या कारण है कि गौरेया हमारे परिवेश से दूर होती जा रही है.

प्रो. भट्ट ने बताया कि औद्योगिकरण, शहरीकरण एवं कृषि विकास से जो पारिस्थितिकी तंत्र में असर पड़ा है. उसके चलते पर्यावरण में असंतुलन पैदा हो गया है. वहीं, दूसरी तरफ कृषि में उपयोग होने वाले कीटनाशकों से भी पक्षियों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है. जिससे पक्षियों के मृत्यु दर में दिनोंदिन इजाफा हो रहा है.

विशेषज्ञ ने बताया कि अधिकांश पक्षी कीटभक्षी भी होते हैं. ऐसे में वह केवल कीड़े-मकोड़े खाकर ही जीवित रहते हैं. क्योंकि अनाज के मुकाबले कीट में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है. जिसकी आवश्यकता पक्षियों को जिंदा रहने के लिए पड़ती है, लेकिन लेकिन कृषि में प्रयोग होने वाले केमिकल और कीटनाशकों की वजह से कीटों से माध्यम से जहर पक्षियों तक पहुंच रहा है. लिहाजा पक्षियों की मृत्युदर बढ़ती जा रही है. ऐसा नहीं है कि पक्षियों के कम होने से मनुष्य पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. बल्कि इससे कहीं ना कहीं मनुष्य के अस्तित्व पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है. लेकिन हम पर्यावरण को लेकर गंभीर नहीं है. आवश्यकता है कि पर्यावरण के प्रति सभी अपनी जिम्मेदारियों को समझें और पक्षियों के संरक्षण में कोई सार्थक कदम उठाएं.

 

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