वन्य जीवों का शिकार करने वालों की कुंडली हुई तैयार

देहरादून। राजाजी टाइगर रिजर्व हरिद्वार में वन्य जीवों के शिकार प्रकरण की जांच एसटीएफ ने लगभग पूरी कर ली है। जांच के दौरान एसटीएफ ने 60 लोगों के बयान दर्ज किए। इसके अलावा विभाग की भूमिका की भी गहनता से जांच की गई। सूत्रों का कहना है कि शिकार में वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। शासन को जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस पर कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।

राजाजी टाईगर रिजर्व हरिद्वार में वन्य जीवों के अंगों की तस्करी और शिकार प्रकरण की जांच 27 मार्च 2019 को एसटीएफ की एसआइटी को सौंपी गई थी। एसटीएफ की डीआइजी रिधिम अग्रवाल के नेतृत्व में सीओ स्वतंत्र कुमार, इंस्पेक्टर संदीप नेगी, इंस्पेक्टर विनोद गुसाईं की टीम प्रकरण की जांच कर रहे हैं। करीब तीन माह की जांच-पड़ताल के बाद एसटीएफ की टीम जांच रिपोर्ट को अंतिम रूप दे रही है। इसके लिए एसटीएफ की टीम ने हरिद्वार से लेकर दून तक के वन अधिकारियों, कर्मचारियों और पार्क से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए हैं।

सूत्रों का कहना है कि इस मामले में विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में आई है। इसके अलावा वन्य जीवों के अंगों की तस्करी और शिकार में शामिल रहे कई अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय गिरोह के बारे में भी जानकारी जुटाई गई है। डीआइजी एसटीएफ रिधिम अग्रवाल ने बताया कि जांच अंतिम चरणों में चल रही है। जल्द इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इस रिपोर्ट में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।

क्या था पूरा मामला 

हरिद्वार स्थित राजाजी टाईगर रिजर्व में 2017-18 में गुलदार की खाल और बाघ का मांस बरामद होने के साथ ही शिकार के प्रमाण मिले थे। करीब दो कट्टों में बाघ का ताजा मांस और खाल बरामद हुआ था। इस मामले की जांच पहले विभागीय स्तर पर की गई। जांच में लीपापोती होने पर सरकार ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए एसआइटी से जांच कराने के निर्देश गृह विभाग को दिए थे।

गुलदार प्रकरण में एसटीएफ ने जुटाए सुराग 

राजाजी टाइगर रिजर्व की हरिद्वार रेंज के दुधियाबंद सेक्शन में वन्य जीवों के शिकार की जांच कर रही चार सदस्यीय एसटीएफ ने वन कर्मियों और दो संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर कई अहम सुराग जुटाए।

रविवार को एसटीएफ ने रायवाला से लाए गए सोनू पुत्र ओमप्रकाश व पंछीनाथ से पूछताछ की। इन दोनों को शुक्रवार को एसटीएफ मुख्यालय लाया गया था। हालांकि पूछताछ के बाद रविवार देर शाम दोनों को छोड़ दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, एसटीएफ ने कुछ वन कर्मियो से भी पूछताछ की है। इस मामले में एसटीएफ के हाथ अहम जानकारियां लगी हैं।

बता दें, राजाजी टाईगर रिजर्व की हरिद्वार रेंज के दुधियाबंद सेक्शन में मार्च 2018 में गुलदार की खाल और बाघ का मांस बरामद होने के साथ ही शिकार के प्रमाण मिले थे। इसके बाद वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। जांच के दौरान जांच अधिकारी मनोज चन्द्रन ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ 15 शिकारियों की संलिप्तता उजागर की थी। सरकार ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए एसआइटी जांच कराने के निर्देश गृह विभाग को दिए थे। गृह सचिव नितेश झा की तरफ से पुलिस मुख्यालय को एसआइटी जांच कराने के आदेश जारी हुए थे।

40 से अधिक लोगों से हो चुकी पूछताछ 

एसटीएफ इस प्रकरण में अब तक चालीस से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है। डीआईजी एसटीएफ रिधिम अग्रवाल का कहना है कि इस मामले में कई अहम जानकारियां मिल गई हैं। जिनकी एक दूसरे से कड़ी जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है। बता दें कि इस मामले को लेकर राजाजी नेशनल पार्क और वन विभाग में लंबे समय तक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा था। इसी वजह से गृह विभाग ने निष्पक्ष जांच के लिए एसटीएफ उत्तराखंड को टास्क सौंपा है।

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