स्ट्राबेरी और फूलों की तैयार फसल फेंकने को मजबूर किसान

हरिद्वार: कोरोना वायरस की मार स्ट्रॉबेरी और फूलों की खेती करने वाले किसानों पर भी पड़ रही है। किसानों के अनुसार लॉकडाउन के चलते स्ट्रॉबेरी और फूलों के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। इन्हें ज्यादा दिन तक रख भी नहीं सकते हैं। अब तैयार फसल खराब होने से किसानों को इसे फेंकना पड़ रहा है।

बीते एक दशक से हरिद्वार के जमालपुर और आने की गांव में किसान स्ट्राबेरी और जलबेरा की विभिन्न प्रजातियों के फूलों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे थे। विशेष तौर पर शादी के सीजन में इनका काम अच्छा चलता था लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते ये किसान बर्बादी की कगार पर आ गए हैं। लाखों रुपये की फसल तैयार करने के बाद अब यह किसान फसल न बिकने के कारण अपने हाथों से फसल को फेंकने के लिए मजबूर हैं।

स्ट्राबेरी की फसल को तैयार करने में आठ माह का समय लगता है। एक बीघे की फसल तैयार करने में किसान को करीब 60 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जिले में करीब 35 ऐसे किसान हैं जो स्ट्राबेरी की खेती कर रहे हैं लेकिन अब सभी परेशान हैं।

ऐसा ही हाल फूलों की खेती करने वाले किसानों का है। फूलों की खेती के लिए इन किसानों ने विशेष तौर पर पॉलीहाउस बनाये थे, लेकिन फूलों की बिक्री न होने के कारण फूल गिरने शुरू हो गये हैं। किसानों ने विभिन्न प्रकार के फूलों की खेती को तैयार करने में करीब चार माह का समय लगाया। लेकिन अब इनकी मेहनत पर पानी फिर रहा है। न तो शादियां हो रहीं हैं और न ही फूल कहीं और बिक रहा है।

क्या कहते हैं किसान

स्ट्राबेरी की खेती करने वाले ग्राम जमालपुर के सहनेजर का कहना है कि उन्होंने खून-पसीने की रकम से फसल तैयार की थी। पहले ओलावृष्टि ने फसल को बर्बाद किया फिर लॉकडाउन ने। वहीं फूलों की खेती करने वाले ग्राम आनेकी निवासी अमित चौहान का कहना है कि ये समय शादी के सीजन का था जिससे हमें काफी उम्मीद थी लेकिन कोरोना ने हमारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। हमें अब अपना घर चलाने की चिंता सता रही है।

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