पूर्वांचल की इन तीन सीटों पर गड़ी है सबकी नजर

गोरखपुर। सभी दलों के लिए प्रतिष्ठित सीट मानी जाने वाली गोरखपुर, च‍र्चित संतकबीर नगर और देवरिया सीट पर भाजपा प्रत्‍याशी को लेकर सबकी नजरें टिकी हैं। आसपास की अधिकांश सीटों पर प्रत्‍याशी घोषित होने के बाद भी इन तीन सीटों पर भाजपा को प्रत्‍याशी का नाम तय करने में पसीने छूट रहे हैं तो इसके पर्याप्‍त कारण हैं।
गोरखपुर 
गोरक्षपीठ की सुरक्षित सीट मानी जाने वाली गोरखपुर सीट पर उप चुनाव में अकल्‍पनीय हार के बाद भाजपा यहां फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। निषाद मतों को साधने के लिए भाजपा ने यहां पर स्‍वर्गीय जमुना निषाद के पूरे कुनबे को भाजपा के पक्ष में कर लिया। बता दें कि जमुना निषाद ने लोक सभा चुनाव में योगी आदित्‍यनाथ को कड़ी टक्‍कर दे चुके हैं और निषाद मतों पर उनकी अच्‍छी पकड़ थी। जुमना की विरासत को उनकी पत्‍नी राजमति और बेटे अमरेंद्र निषाद आगे बढ़ा रहे हैं। जमुना निषाद के कुनबे को साधने के बाद भाजपा ने यहां से सपा के सिंबल पर उप चुनाव में जीत हासिल करने वाले सांसद प्रवीण निषाद और निषाद पार्टी अध्‍यक्ष संजय निषाद को भी भाजपा ने अपने पक्ष में कर लिया लेकिन भाजपा इससे पहले आगे कुछ कर पाती सपा ने भाजपा के नहले पर दहला फेंकते हुए रामभुआल निषाद को अपना प्रत्‍याशी घोषित कर दिया।
रामभुआल निषाद के सपा से मैदान में आने के बाद भाजपा बैकफुट पर आ गई और फ‍िर नई रणनीति पर कार्य शुरू हुआ। नई रणनीति में किसी बाहरी चर्चित प्रत्‍याशी की तलाश शुरू हुई तो भोजपुरी फ‍िल्‍मों के कलाकार रवि किशन के नाम पर चर्चा शुरू हुई। केवल दो दिन इस नाम पर चर्चा होकर फ‍िर सीन बदल गया आैर पार्टी हाईकमान ने स्‍थानीय नेताओं पर नजर डालनी शुरू की। कई चक्र के गोपनीय सर्वे और लोगों से फीडबैक लेने के बाद ऐसे नामों पर विचार शुरू हुआ जो ‘मंदिर’ को प्रिय हो और संगठन से भी छत्‍तीस का आकड़ा न हो। गोरखपुर में ऐसे एक दो लोग ही हैं जो संगठन में सक्रिय हैं और ‘मंदिर’ को भी प्रिय हैं। इन पर अब भी पार्टी विचार कर रही है लेकिन पार्टी का एक धड़ा गोरखपुर में जमीन से जुड़े दो अन्‍य नेताओं में भी ‘संभावना’ तलाश रहा है। चर्चा इस पर भी हो रही है कि यदि गोरखपुर से जुड़े किसी नाम पर सहमति नहीं बनी तो बाहर से किसी बड़ी सख्यित को लाया जाए।
देवरिया 
यही हाल देवरिया सीट का भी है। यहां करीब आधा दर्जन नामों पर चर्चा होने के बाद मीडिया से जुड़े एक युवा नेता और यहां से सांसद रहे एक बड़े नेता के पुत्र का नाम चर्चा में है। पिछले दिनों जिला पंचायत अध्‍यक्ष को लेकर हुए बवाल में पार्टी कार्यकर्ताओं के पक्ष में खुलकर खड़े होने और अपनी स्‍वच्‍छ छवि के कारण यह युवा नेता दौड़ में आगे हैं लेकिन कई अन्‍य लोग भी अभी अपनी दावेदारी से पीछे नहीं हटे हैं। यहां से मंत्री रहे एक नेता की ‘अतिरिक्‍त सक्रियता’ के कारण यहां पर पेंच फंसा है। बताया जा रहा है कि पार्टी यहां से जिसे टिकट देना चाह रही है उसपर यह समहत नहीं है। यहां से बाहर के एक अन्‍य प्रभावशाली नेता भी परदे के पीछे से इस सीट के लिए अपना गुणा गणित बैठा रहे हैं।
संतकबीर नगर
‘जूताकांड’ से चर्चा में आई संतकबीर नगर सीट पर भी भाजपा को प्रत्‍याशी का नाम तय करने में पसीने छूट रहे हैं। यहां से वर्तमान सांसद शरद त्रिपाठी और मेंहदावल से विधायक राकेश बघेल के बीच बैठक में ‘जूताकांड’ के बाद शरद त्रिपाठी के नाम को लेकर संदेह हुआ तो पार्टी ने यूपी बीजेपी से जुड़े एक और बड़े नाम पर विचार शुरू किया। जिस नाम पर चर्चा हो रही है वह संगठन में बड़े पद पर रह चुके हैं और इस समय एक केंद्रीय नेता के प्रिय हैं। संतकबीर नगर से बात न बनने की दशा में इनकी नजर देवरिया सीट पर भी है। संतकबीर नगर में पार्टी अपने एक विधायक और प्रदेश स्‍तर के एक अन्‍य पदाधिकारी में भी ‘संभावना’ तलाश रही है।
शीघ्र घोषित होंगे नाम : भाजपा
भाजपा के प्रदेश प्रवक्‍ता डा. समीर सिंह ने बताया कि इस तीनों पर सीटों के अलावा आजमगढ और लालगंज, घोषी की सीटों को लेकर नामों पर विचार चल रहा है। स्‍थानीय स्‍तर से पार्टी नेतृत्‍व ने नामों को लेकर परामर्श किया है। शीघ्र ही इन सीटों पर प्रत्‍याशियों की घोषणा की जाएगी।

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