19 वर्षीय लड़के ने आविष्कार से ऐप्पल, गूगल को दी मात

सपनों का पीछा करने में कठिनाई है, लेकिन ऐसा बिलकुल ना करना सबसे बड़ी मुर्खता है। बहुत सारे सपने इसलिए बिखर जाते हैं क्योंकि लोग या तो सपनों के लिए सही समय का इंतजार करते हैं और अपने आप को साबित करने का अवसर ढूंढ़ते रहते हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरफ सिद्धांत वत्स जैसे लोग हैं जो यह विश्वास करते हैं कि बिना कुछ किये आपको कुछ भी खास हासिल नहीं हो सकता और अपनी सफलता की कहानी आपको खुद ही लिखनी पड़ती है। इस लड़के ने एक उद्देश्य को सिद्ध करने के लिए अपनी हाई स्कूल की पढ़ाई छोड़ दी और अपने गेम के ज़रिये एप्पल, सैमसंग, नोकिया और दूसरे बड़े स्मार्ट फोन को भी परास्त किया।

यूँ तो इस युवा व्यक्ति के नाम बहुत सी उपलब्धियां दर्ज़ है। क्या वजह है जिससे वह हम सबसे अलग है और अपने जुनून पर सामाजिक उम्मीदों को कभी हावी नहीं होने देते। उनका जन्म और पालन-पोषण दोनों ही बिहार की माटी में हुआ। 19 साल की कम उम्र में सिद्धांत ने अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर विश्व का पहला एनड्रॉइड स्मार्टवाच बनाया। उनके इस नए प्रयोग ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया, खासकर विदेशों में तो इसे लाखों लोगों ने हाथों-हाथ ख़रीदा। इनके स्मार्टवॉच के बारे में ढेर सारे आर्टिकल लिखे गए। यह स्मार्टवॉच स्मार्टफोन, कंप्यूटर और एक जीपीएस डिवाइस का सम्मिलित रूप है।

यह बहुत ही असाधारण बात है कि जब दिग्गज गूगल और एप्पल ने अपने स्वयं के स्मार्टवॉच को विकसित करने की घोषणा की उसके एक हफ्ते के अंदर ही सिद्धांत ने अपना स्मार्टवॉच लांच कर दिया। बिना ज्यादा खर्च किये इनकी तीन दोस्तों की टीम ने यह कारनामा कर दिखाया। सिद्धांत की उपलब्धियों को देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि अपनी रूचि और जुनून के बल पर व्यक्ति सब कुछ हासिल कर सकता है उसके लिए कोई पारंपरिक शिक्षा की जरुरत नहीं होती। जब उन्होंने स्कूल छोड़ने का निश्चय किया तब उनके माता-पिता इसके लिए बिलकुल तैयार नहीं थे। लेकिन बाद में उन्होंने महसूस किया कि सिद्धांत का विश्वास पूरी तरह से मजबूत है और कोई भी नई टेक्नोलॉजी के लिए इंतजार करना सही नहीं है शिक्षा तो बाद में भी ली जा सकती है।

“बहुत लंबे समय तक एक ही काम करने से मुझे ख़ुशी नहीं मिलती। मैं अपने सपनों का पीछा करना चाहता हूँ। मेरे मन में जो कुछ भी आता है मैं उसे करना चाहता हूँ”

सिद्धांत और उनके तीन दोस्तों ने जो स्मार्टवॉच बनाया है उसमें फोटो लेने के लिए दो मेगा पिक्सेल का कैमरा भी है। इस डिवाइस में ब्लूटूथ, अच्छी मेमोरी, अच्छी इन्टरनेट कनेक्टिविटी और ढेर सारे ऐप भी डाऊनलोड कर सकते है।

यह उम्र होती है जब बच्चे सारा दिन खेल के मैदानों में ही गुजार देते हैं लेकिन सिद्धांत अपनी माता के द्वारा चलाये जा रहे एनजीओ में गरीब बच्चों को कम्प्यूटर, इंग्लिश और गणित पढ़ाते हैं। वत्स वर्तमान में लंदन में पढ़ाई कर रहे हैं और अपने उत्साह और ज्ञान के द्वारा वाट लाओ समुदाय के लोगों में भी प्रसिद्धी हासिल कर चुके हैं। ये बोध गया में एक अन्तराष्ट्रीय मठ भी बनाना चाहते हैं। इससे न केवल फॉरेन इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा बल्कि बिहार टूरिज्म को भी फायदा होगा।

सिद्धांत को 2015 में प्रतिष्ठित लार्ड बेडेन पॉवेल नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह TEDx स्पीकर भी रह चुके हैं जिसमें इन्होंने बेलफ़ास्ट में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। आयरलैंड में होरासिस ग्लोबल बिज़नेस मीट में यह सबसे कम उम्र के स्पीकर थे।

इतनी कम उम्र में इतनी ऊँचाई हासिल करने वाले सिद्धांत न केवल प्रेरणा के स्रोत हैं बल्कि युवा शक्ति के लिए मिसाल बन चुके हैं। सिद्धांत जैसी सोच रखने वाले बच्चों के भीतर ही देश को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की असली खूबी है।

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