UJVNL और THDC ज्वाइंटर वेंचर में बनाएंगे 3160 मेगावाट के प्रोजेक्ट्स

देहरादून : बिजली की खपत और डिमांड में तीन गुना से भी अधिक का अंतर है। भविष्य में यह अंतर चार से पांच गुना होने के आसार हैं। सरकार बिजली की लगातार बढ़ती मांग से चिंतित है। बिजली परियोजनाएं बन नहीं रही है और दूसरे राज्यों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। इधर, गंगा में हाइड्रो पावर प्रोजेक्टों के निर्माण पर रोक लगी है। इसलिए राज्य सरकार दुर्गम क्षेत्रों में गंगा की सहायक नदियों पर बांधों के निर्माण का विकल्प तलाश रही है।

उत्पादन और खपत में 3 गुना अंतर
वर्तमान में राज्य में जल विद्युत परियोजनाओं से 12-13 मिलियन यूनिट रोजाना बिजली का उत्पादन हो रहा है, जबकि बिजली की मांग 36-37 मिलियन यूनिट रोजाना बिजली की खपत है। केंद्रीय पूल से मिलने वाली बिजली मिलाकर भी 9-10 मिलियन यूनिट रोजाना दूसरे राज्यों से खरीदी जा रही है।

यूजेवीएन और टीएचडीसी साझेदार
राज्य में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएन) लिमिटेड और टिहरी हाईड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (टीएचडीसी) को मिलाकर एक संयुक्त उपक्रम बनाया है। ये दोनों बिजली कंपनियां ज्वाइंट वेंचर में करीब 3160 मेगावाट की सात बिजली परियोजनाओं के निर्माण को अमलीजामा पहनाएंगे। कैबिनेट से संयुक्त उपक्रम को मंजूरी मिलने के बाद पार्टनरशिप की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

टीएचडीसी का शेयर 76 परसेंट

संयुक्त उपक्रम की बिजली परियोजनाओं में टीएचडीसी का करीब 76 प्रतिशत शेयर रहेगा, जबकि 24 प्रतिशत शेयर यूजेवीएनएल का होगा। खास बात यह है कि टीएचडीसी केंद्र का उपक्रम है और इकोनॉमिकल मजबूत है। एनटीपीसी का भी टीएचडीसी के पास शेयर है। इसलिए टीएचडीसी के पास पैसे की कमी नहीं है। इसके इतर राज्य में सीमित रिसोर्स हैं।

आरओसी में होगा रजिस्ट्रेशन
टीएचडीसी और यूजेवीएनएल का संयुक्त उपक्रम बनने के बाद एक नई कंपनी बनानी होगी, जिसे रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में रजिस्टर कराना होगा। आरओसी का दफ्तर कानपुर में है। शासन स्तर पर इसकी तैयारी की जा रही है।

ये प्रोजेक्ट ज्वाइंट वेंचर में प्रोजेक्ट का नाम क्षमता (मेगवाट में)
– धौलीगंगा : 330
– उर्थिंग सोबला : 340
– नंदप्रयाग लंगासू : 100
– झेलम तमक : 126
– तमक लता : 295
– बगोली : 11़
– रामगंगा : 1950
कुल 3160

मुनाफा 26 और रायल्टी 12 प्रतिशत
इन परियोजनाओं के बनने से राज्य को 26 प्रतिशत सीधा मुनाफा होगा। इसके साथ ही 12 प्रतिशत रॉयल्टी के रूप में मिलेगी। इससे आय के संसाधन बढेंगे और राज्य का राजस्व बढेगा। जिन क्षेत्रों में पावर प्रोजेक्ट तैयार होंगे वहां का विकास होगा। साथ ही रोजगार के नए अवसर बढेंगे।

ज्वाइंट वेंचर का ड्राफ्ट अभी प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश मिलते ही इस दिशा में तेजी से कदम आगे बढ़ाया जाएगा। बहरहाल यह राज्य सरकार का सार्थक निर्णय है। इससे न सिर्फ बिजली जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि राजस्व के साथ रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
संदीप सिंघल, एमडी, यूजेवीएन लिमिटेड

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