उत्तराखंडः विकास निधि खर्च करने में जनप्रतिनिधि फिसड्डी

हल्द्वानीः उत्तराखंड में जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में विकास के प्रति कितने गंभीर हैं इसकी एक तस्वीर सामने आई है. स्थिति यह है कि विधायक अपनी विकास निधि भी पूरी खर्च नहीं कर पाए. आरटीआई के तहत हुए खुलासे में पता चला कि राज्य में 40 प्रतिशत विधायक निधि खर्च होने को शेष है. तो वहीं 17 विधायकों की आधी से कम तथा 5 विधायकों की 75 प्रतिशत से अधिक खर्च हो चुकी है. काशीपुर के सूचना अधिकार विशेषज्ञ नदीम उद्दीन एडवोकेट द्वारा बीते दिनों सूचना अधिकार से प्राप्त सूचनाओं के छपने से हुआ भारी सुधार आया है.

उत्तराखंड के वर्तमान विधायकों को दिसम्बर 2019 तक कुल 798.75 करोड़ रूपये की विधायक निधि उपलब्ध हुई जबकि उसमें से दिसम्बर 2019 तक केवल 60 % रकम 481.16 करोड़़ की विधायक निधि ही खर्च हो सकी. 40 % विधायक निधि 317.58 करोड़ की विधायक निधि खर्च होने को शेष है. सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन को ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना से यह मामला प्रकाश में आया है.

नदीम उद्दीन ने बीते दिनों उत्तराखंड के ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय से विधायक निधि खर्च सम्बन्धी सूचना मांगी थी. जिसके उत्तर में लोक सूचना अधिकारी/आयुक्त हरगोविंद भट्ट द्वारा विधायक निधि वर्ष 2017-18 से 2019-20 का विवरण दिसम्बर 2019 उपलब्ध कराया, जिसमें दिसम्बर 2019 के अंत तक की विधायक निधि खर्च का विवरण दिया गया था. उपलब्ध सूचना के अनुसार उत्तराखंड के 71 विधायक को 1125 लाख रूपये प्रति विधायक की दर से 79875 लाख रूपये की विधायक निधि दिसम्बर 2019 तक उपलब्ध करायी गयी.

इसमें से जनवरी 2020 के प्रारंभ में 3175 लाख रुपये की विधायक निधि खर्च होने को शेष है. उत्तराखंड के 71 विधायकों में 17 विधायकों की आधी विधायक निधि भी खर्च नहीं हुई है. सबसे कम विधायक निधि खर्च करने वाले विधायक धारचूला विधायक हरीश सिंह धामी है जिनकी केवल 30 प्रतिशत विधायक निधि खर्च हुई है

जबकि इनसे अधिक 33 प्रतिशत केदारनाथ विधायक मनोज रावत तथा 39 प्रतिशत खर्च वाले रानीखेत विधायक करन मेहरा हैं. इनके अतिरिक्त हरिद्वार विधायक मदन कौशिक की 40, श्रीनगर विधायक धनसिंह, जागेश्वर विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल की 41-41 प्रतिशत, गंगोत्री विधायक गोपाल सिंह रावत की 43, गंगोली हाट विधायक मीना गंगोला की 44, बदरीनाथ विधायक महेन्द्र भट्ट तथा डीडीहाट विधायक विशन सिंह चुफाल की 45-45 प्रतिशत, थराली विधायक मगन लाल शाह, पिथौरागढ़ विधायक प्रकाश पंत तथा कर्णप्रयाग विधायक सुरेन्द्र सिंह नेगी की 46-46 प्रतिशत, चकराता विधायक प्रीतम सिंह, प्रताप नगर विधायक विजय सिंह पवार की 47-47 प्रतिशत, खटीमा विधायक पुष्कर सिंह धामी की 48 प्रतिशत, द्वाराहाट विधायक महेश नेगी की 49 तथा विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान की 50 प्रतिशत विधायक निधि दिसम्बर 2019 तक खर्च हो सकी है.

उत्तराखंड के 5 विधायकों की 75 प्रतिशत से अधिक विधायक निधि खर्च हो चुकी है. सर्वाधिक 78 प्रतिशत विधायक निधि हरिद्वार ग्रामीण से विधायक यतीश्वरानन्द की दिसम्बर 2019 तक खर्च हुई है. 76 प्रतिशत विधायक निधि खर्च वाले विधायकों में 4 विधायक बीएचईएल हरिद्वार से आदेश चौहान, लक्सर से संजय गुप्ता, कपकोट से बलवन्त सिंह, भगवानपुर से ममता राकेश हैं.

74 प्रतिशत विधायक निधि खर्च वालों में 5 विधायकों में नामित जी आई.सी.मैनन, मंसूरी से गणेश जोशी, टिहरी से धनसिंह नेगी, लालकुआं से नवीन चन्द्र दुम्का तथा लोहाघाट से पूरन सिंह फत्र्याल हैं.

73 प्रतिशत खर्च वाले 3 विधायक खानपुर से कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन, रूड़की से प्रदीप बत्रा तथा भीमताल से राम सिंह कैड़ा हैं. धर्मपुर से विनोद चमोली तथा कैंट विधायक हरबंश कपूर व सितारगंज से सौरभ बहुगुणा की 72 प्रतिशत तथा कालाढूंगी से बंशीधर भगत, पुरौला से राजकुमार, गदरपुर से अरविन्द पाण्डेय की 71 प्रतिशत विधायक निधि खर्च हो सकी है.

उपलब्ध विवरणों के अनुसार वर्ष 2017 की तुलना में वर्ष 2019 में विधायक निधि खर्च की धनराशि में भारी सुधार हुआ है. दिसम्बर 2017 में उपलब्ध 195.25 करोड़ की विधायक निधि में से केवल 12 प्रतिशत 23.29 करोड़ की धनराशि ही खर्च हुई थी.

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