NRC पर राजनीति: दिल्ली का कौन अपना और कौन पराया?

दिल्ली (Delhi) में एनआरसी (NRC) को लेकर बयानबाजी हो रही है. अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी (Manoj Tiwari) पर तंज कसा है. इस बीच ये जानना दिलचस्प है कि दिल्ली में कितने दूसरे राज्यों के लोग रह रहे हैं…

दिल्ली (Delhi) के सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) से पूछा गया था कि क्या दिल्ली में असम की तरह एनआरसी (NRC) लागू होगी. अरविंद केजरीवाल बोले कि अगर ऐसा हुआ तो सबसे पहले मनोज तिवारी (Manoj Tiwari) को दिल्ली छोड़नी पड़ेगी. अरविंद केजरीवाल बीजेपी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी पर तंज कस रहे थे. मनोज तिवारी कई बार दिल्ली में भी असम की तर्ज पर एनआरसी लागू करने की बात कह चुके हैं. मनोज तिवारी का कहना है कि दिल्ली में काफी बाहरी घुसपैठिएं हैं, जिन्हें बाहर निकालना जरूरी है.

मनोज तिवारी पर अरविंद केजरीवाल का बयान शुद्ध राजनीतिक है. एनआरसी की लिस्ट से सिर्फ उन लोगों को बाहर रखा जाता है, जो गैरकानूनी तरीके से देश में रह रहे हैं. इसलिए मनोज तिवारी का पूर्वांचल का होने के कारण सिर्फ अरविंद केजरीवाल ने उनपर तंज कसा है. लेकिन इसके बावजूद ये जानना दिलचस्प होगा कि वर्तमान में दिल्ली की डेमोग्राफी क्या है? किस प्रदेश से आए लोग सबसे ज्यादा दिल्ली में रह रहे हैं और अक्सर बिहार और पूर्वांचल के लोगों पर दिल्लीवाले जो तंज कसते हैं, उसकी हकीकत क्या है?

दिल्ली में कितनी है दूसरे राज्यों से आए लोगों की संख्या?

दिल्ली में काफी बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से आए लोग रहते हैं. 2011 की जनसंख्या के मुताबिक दिल्ली देश का दूसरा ऐसा प्रदेश है, जहां सबसे ज्यादा संख्या में दूसरे राज्यों से लोग आते हैं. दिल्ली में काम करने और शादी की वजह से बाहर से आकर बसने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है. हालांकि पहला स्थान अभी भी महाराष्ट्र का है. दूसरे राज्यों से पलायन करके महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा लोग आते हैं.

हालांकि दिल्ली की कुल आबादी से तुलना करने पर यहां सबसे ज्यादा बाहरी लोग रहते हैं. एक आंकड़े के मुताबिक दिल्ली में रहने वाला हर तीसरा हरियाणवी शादी करने के लिए यहां आ जाता है. नॉर्थ ईस्ट के लोग पढ़ाई-लिखाई के लिए दिल्ली आते हैं. वहीं केरल के लोग ज्यादातर कामकाज की तलाश में दिल्ली का रूख करते हैं.

दिल्ली की 40 फीसदी आबादी बाहरी

दिल्ली की कुल आबादी के करीब 40 फीसदी लोग बाहर से आए हैं. 63 लाख लोगों ने दूसरे राज्यों से आकर दिल्ली में शरण ली है. इसमें 23.6 लाख लोगों ने परिवार सहीत दिल्ली को अपना ठिकाना बना लिया है. करीब 19.8 लाख लोग काम-धंधे या नौकरी की तलाश में दिल्ली आए हैं. 12.2 लाख लोग अपनी शादी के सिलसिले में दिल्ली आकर रहने लगे हैं. करीब 1 लाख लोग सिर्फ पढ़ाई-लिखाई के लिए दिल्ली में रहते हैं. जबकि 6.8 लाख लोग अन्य वजहों से दिल्ली में रह रहे हैं.

दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में बाहर से आकर रहने वाले लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है. दिल्ली की कुल बाहरी आबादी में से 40 फीसदी लोग दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली और न्यू दिल्ली में रहते हैं.

दिल्ली आने वाले लोगों की संख्या में कमी

दिल्ली में बाहरी लोगों पर अक्सर तंज कसा जाता है. कई मौकों पर बिहार और यूपी के लोगों को यहां की गदंगी और अपराध के लिए जिम्मेदार माना जाता है. लेकिन एक दिलचस्प तथ्य ये है कि पहले जिस रफ्तार से बाहरी लोग दिल्ली आ रहे थे, उसमें अब काफी कमी आई है. 2001 से लेकर 2011 के बीच बाहर से दिल्ली आने वाले लोगों की संख्या में भारी कमी देखी गई है.

1991 में करीब 17.7 लाख पुरुष दूसरे राज्यों से दिल्ली आए. 2001 में ये आंकड़ा बढ़कर 29.8 लाख हो गया. यानी इन 10 वर्षों में बाहरी राज्यों के पुरुषों के दिल्ली आकर रहने में 68.6 फीसदी की दर से बढ़ोत्तरी दर्ज हुई. वहीं 2011 में बाहर से दिल्ली आए पुरुषों की संख्या 33.1 लाख थी. यानी 2001 से 2011 के बीच बाहरियों के आने में सिर्फ 11 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई.

यही हाल महिलाओं की संख्या में भी हुआ है. 1991 से लेकर 2001 के बीच जहां महिलाएं 56.2 फीसदी की रफ्तार से दिल्ली आ रही थीं, वहीं 2001 से लेकर 2011 के बीच बाहर से आने वाली महिलाओं की संख्या में सिर्फ 28.9 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई.

दिल्ली के बाहरी लोगों में आधे लोग यूपी के

एक दिलचस्प आंकड़ा ये है कि दिल्ली में रहने वाले लोगों में यूपी वालों की संख्या सबसे ज्यादा है. कुल बाहरी लोगों में सिर्फ यूपी की हिस्सेदारी आधे की है. यूपी के बाद सबसे ज्यादा बिहार, झारखंड और उत्तराखंड के लोग यहां आकर रहते हैं.

एनआरसी के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल भले ही मनोज तिवारी पर तंज कस रहे हों. लेकिन दिल्ली के लिए दोनों एकसमान ही हैं. मनोज तिवारी ने बिहार में जन्म लेकर कामकाज के सिलसिले में पहले मुंबई फिर दिल्ली को अपना ठिकाना बनाया. वहीं अरविंद केजरीवाल की पैदाइश भी हरियाणा की है. दिल्ली के सीएम बनने से पहले तक वो यूपी के गाजियाबाद में रह रहे थे.

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