बाल मजदूरों की सुध कौन लेगा सरकार ? 

(मोहन भुलानी )

इंसान की जिंदगी का सबसे हसीन पल होता है बचपन। न किसी बात की चिंता, न कोई जिम्मेदारी। बस हर समय अपनी धुन में खोए रहना। खेलना, कूदना और पढ़ना। लेकिन सभी का बचपन एक जैसा नहीं होता। बाल मजदूरी एक ऐसी समस्या है, जिससे बचपन और जिंदगी, दोनों खत्म हो जाते हैं। आज दुनिया भर में 21.5 करोड़ ऐसे बच्चे हैं, जिनकी उम्र 14 वर्ष से कम है और इन बच्चों का समय स्कूल की पढ़ाई और दोस्तों के बीच नहीं, बल्कि होटलों, घरों में झाड़ू-पोंछे के बीच बीतता है। बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी हर गली पर कई ऐसे बच्चे मिल जाएंगे, जो हालात के चलते बाल मजदूरी की गिरफ्त में फंस गए हैं। मजदूरी के कारण 50 प्रतिशत बच्चे शारीरिक प्रताड़ना के शिकार हो रहे हैं। बाल मजदूरी को जड़ से खत्म करने के लिए जरूरी है, गरीबी को खत्म करना। सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे। सिर्फ सरकार ही नहीं, आम जनता को भी सहयोग करना होगा। क्या आपको नहीं लगता कि कोमल बचपन को इस तरह दलदल में जाने से आप रोक सकते हैं। देश के सुरक्षित भविष्य के लिए वक्त आ गया है कि हम सबको बाल मजदूरी को रोकना चाहिए।

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