क्या भारत का अमेजन और अलीबाबा बनेगी जियो टेलीकॉम!

मुंबई. मुकेश अंबानी की टेलीकॉम कंपनी क्या भारत की एक नया अमेजन बनेगी? क्या वह चाइना की अलीबाबा बनेगी? आनेवाले आंकड़े और भविष्य तो कुछ ऐसे ही संकेत दे रहे हैं। हाल में इस कंपनी ने जो निवेश हासिल किया है जरा उसे देखिए। कोविड के दौरान उसे जिस तरह की फंडिंग मिली है, वह अविश्वसनीय है। जियो प्लेटफॉर्म में आज 10-15 सेवाएं हैं और उसके पास 5 अरब डॉलर से ज्यादा का एक बड़ा मार्केट है।

अमेरिका और चीन के बाद भारत सबसे आकर्षक बाजार

भारत एक बड़ा बाजार है जिसे मुकेश अंबानी संभावित रूप से देख रहे हैं। जियो ई-कॉमर्स के अवसर, खुदरा के अवसर, ओटीटी सामग्री के साथ-साथ पेमेंट प्लेटफार्म में 2 ट्रिलियन डॉलर बाजार के करीब है। भारत स्पष्ट रूप से अमेरिका और चीन के बाद एक काफी आकर्षक बाजार है। अमेरिका और मध्य पूर्व के इन सभी वैश्विक निवेशकों के लिए यह एक बाजार का दोहन करने का अवसर है। एक ऐसा बाजार जहां 50 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हैं और जहां 70 करोड़ स्मार्टफोन हैं।

जियो टेलीकॉम के निवेशकों को एक बड़ा बाजार मिला है

2 ट्रिलियन डॉलर के बाजार के अवसर को भुनाने के लिए हाल में जियो टेलीकॉम में आए निवेशकों को जियो प्लेटफॉर्म के जरिये एक आकर्षक अवसर मिला है। अमेरिका और चीन में वैश्विक समानताओं की तुलना की जाए तो यह सामने आता है कि जो कंपनी प्लेटफॉर्म ओरिएंटेड है और इसके आस-पास प्लेटफार्म का निर्माण करती है, वे बहुत अधिक बाजार हिस्सेदारी पर कब्जा जमा लेती है।

अमेजन अमेरिका में 40 प्रतिशत और अलीबाबा चीन में 60 प्रतिशत बाजार पर कब्जा जमाई है

अमेरिका में अमेज़ॅन को 40 प्रतिशत बाजार के साथ देखा गया है। चीन में अलीबाबा को ई-कॉमर्स मार्केट  के 60 प्रतिशत हिस्सेदारी के रूप में देखा गया है। इसने मजबूत डिजिटल विज्ञापन बाजार के रूप में एक मजबूत पेमेंट बाजार को कब्जा किया है। टेलीकॉम में निवेश जियो प्लेटफॉर्म के लिए है। यही वह जगह है जहां मुख्य बिजनेस है और यह बहुत सारे निवेशकों के लिए एक मंजिल है। लेकिन नए ऐप्स या नए इकोसिस्टम से संचालित होने वाला अतिरिक्त वैल्यू रिटेल बिजनेस के आस-पास बनाया जा रहा है।

पेमेंट, इकोसिस्टम और साथ ही ओटीटी और विज्ञापन पर होने वाला खर्च काफी अलग है। यह एक बहुत बड़ा अवसर बनाता है।

ई-कॉमर्स रिटेल मार्केट 2025 में 1.2 ट्रिलियन डॉलर का बाजार होगा

यह किसी भी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण है। ई-कॉमर्स रिटेल मार्केट 2025 में 1.2 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट बनने जा रहा है। पेमेंट का बाजार 700 अरब डॉलर का होगा। यह एक और महत्वपूर्ण बाजार होने जा रहा है। ओटीटी एडवर्टाइज मार्केट 100 अरब डॉलर के करीब होने जा रहा है। इसलिए वायरलेस और मोबाइल अवसर से परे, यह बड़ा अवसर है। यह 3 करोड़ किराना स्टोर के लक्ष्य के साथ एक बड़ा अवसर है।

3 करोड़ किराना स्टोरों को डिजिटाइज करने की उम्मीद

जियो काफी हद तक आनेवाले समय में मार्केट में उतरने की योजना बना रही है। 3 करोड़ किराना स्टोरों को डिजिटाइज करने की योजना है। साथ ही जियोमार्ट प्लेटफॉर्म का निर्माण बड़े पैमाने पर किया जाएगा। ऐसे में कोई भी उम्मीद कर सकता है कि पूरा जियो प्लेटफॉर्म भी अगले पांच वर्षों में पूरे रेवेन्यू क्षमता या मोनेटाइजेशन क्षमता का काफी महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।

जियो के पास वाट्सऐप जैसा एक बड़ा पार्टनर है

ई-कॉमर्स में अवसर को ध्यान में रखते हुए देखा जाए तो पेमेंट साइड में यह 130-140 अरब डॉलर का बाजार होने जा रहा है। एक साझेदार के नाते जियो के फेसबुक होने की भी पूरी क्षमता है। टेक्नोलॉजी, क्षमता के साथ-साथ किराना स्टोर, छोटे व्यवसायों के लिए मैसेजिंग और ऑनबोर्डिंग के रूप में कार्य करती है। लेन-देन के लिए जियो के पास वाट्सऐप जैसा एक बहुत बड़ा पार्टनर है। वाट्सऐप के 40 करोड़ यूजर्स हैं।

जियो में मार्जिन प्रोफाइल काफी मजबूत दिख रहा है

अमेरिका में अमेज़न के साथ समानताएं देखने को मिलती हैं। क्योंकि वे ई-कॉमर्स मॉडल के साथ अपने विज्ञापन मॉडल का निर्माण कर रही है। इन बड़े प्लेटफार्म के अलावा चीन के बाजार में टेंसेन्ट और अलीबाबा का समावेश है। संभावित रूप से एक काफी मजबूत मार्जिन प्रोफ़ाइल जियो को आगे दिख रहा है। ई-कॉमर्स में बड़े पैमाने पर और एडवरटाइजिंग रेवेन्यू में प्रवेश करने पर जियो को ब्रांड के रूप में संभावित रूप से किराना स्टोर के इस पूरे नेटवर्क का उपयोग करने का अवसर मिलेगा। इससे मार्जिन प्रोफाइल विस्तार निश्चित रूप से संभव है।

विश्व में कई कंपनी ई-कॉमर्स में हैं जो टॉप पर हैं

विश्व स्तर पर ऐसी तमाम कंपनीज हैं जो शुद्ध रूप से ई-कॉमर्स में हैं और साथ ही प्लेटफार्म बिजनेस में उनका बहुत अधिक मार्जिन है। इसके जरिए कंपनियों के पास यह क्षमता होती है कि वे 40-50 करोड़ यूजर्स तक पहुंच जाती हैं। दूसरी ओर, किराना स्टोर के साथ ई-कॉमर्स पर एक बहुत मजबूत नेटवर्क है। इससे बहुत ज्यादा मोनिटाइजेशन की संभावना है। यह आमतौर पर एक उच्च मार्जिन वाला बिजनेस है। यहां से मार्जिन विस्तार की एक बहुत मजबूत क्षमता और संभावना है।

110 अरब डॉलर की होगी वैल्यू- बैंक ऑफ अमेरिका मैरिल लिंच

उधर बैंक ऑफ अमेरिका मैरिल लिंच की रिपोर्ट कहती है कि रिलायंस जियो इंफोकॉम की पैरेंट कंपनी जियो प्लेटफॉर्म का वैल्यू 2021-22 तक 110 अरब डॉलर हो सकता है। वर्तमान वैल्यू की तुलना में यह वृद्धि 66 प्रतिशत की होगी। फिलहाल कंपनी की वैल्यू 66 अरब डॉलर आंकी गई है। कारण यह है कि कंपनी को प्रति यूजर मिलनेवाले मोबाइल बिजनेस रेवेन्यू में तेजी से हो रही वृद्धि से इसके फाइबर ब्रॉडबैंड, इंटरप्राइजेस बिजनेस और डिजिटल एड बिजनेस में आनेवाले समय में अच्छा रेवेन्यू मिलेगा।

टेलीकॉम बाजार में जियो की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत हो सकती है

इस ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि 2021-22 में जियो का मासिक एवरेज रेवेन्यू प्रति यूजर्स 53 प्रतिशत बढ़कर 200 रुपए हो जाएगा। यह अभी 131 रुपए पर है। ब्रोकरेज हाउस ने कहा है कि जियो के आईपीओ से रिलायंस इंडस्ट्रीज को फायदा होगा। क्योंकि आरआईएल जियो की पैरेंट कंपनी है। टेलीकॉम बाजार में जियो की हिस्सेदारी 2021-22 तक बढ़कर 45 प्रतिशत होने की उम्मीद है। इसी अवधि में इसके ग्राहकों की संख्या 53.8 करोड़ पर पहुंच सकती है। जबकि होम ब्रॉडबैंड के ग्राहकों की संख्या 2.5 करोड़ हो सकती है।

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