निकाह में उलमा के बैंडबाजा रोकने पर महिलाएं भड़की

बरेली : निकाह में बैंडबाजा-डीजे पर पाबंदी की कोशिश एक उलमा को ही भारी पड़ गई। युवती के निकाह से पहले उनके रिश्तेदार बैंडबाजे के साथ बरात लेकर आए थे। बाजे की भनक लगते ही वहां उलमा पहुंच गए। बाजे को गैर शरई बताते हुए इसे बंद करने को कहा तो कार्यक्रम में शामिल महिलाएं उनसे भिड़ गईं। हालांकि, तब मामला शांत हो गया। अगले दिन फिर बैंडबाजे की धुन गूंजी तो कई उलमा निकाह वाले घर पहुंचे। इससे परिवार वाले खफा हो गए।

घटना दो दिन पहले फतेहगंज पश्चिमी कस्बा की है। मुहल्ले वालों ने अपने क्षेत्र की मस्जिद के इमाम पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह इस पाबंदी के लिए दूसरे इमाम साहब को बुला लेते हैं। चर्चा तो यह भी है कि इमाम साहब की पाबंदी से खफा होकर लोग मस्जिद के लिए दूसरे इमाम की तलाश में लग गए हैं। लोगों ने मुहर्रम पर बैंडबाजे और निकाह में शेहरा पढ़े जाने पर भी रोक का मुद्दा उठाया है। इस मामले में जामा मस्जिद के इमाम हाफिज इस्लाम बारिस ने बताया कि मुहर्रम में ढोल बजाना गलत है। शादी में भी फिल्मी धुन पर बैंड बजाना, नाचना गलत है। नूरी मस्जिद के इमाम मास्टर अबरार अंजुम ने कहा कि महिलाओं की मौजूदगी में दूल्हे का सेहरा भी नहीं पढ़ा जाना चाहिए।

बैठक के बाद उलमा का फैसला

शादियों में बैंडबाजे पर पाबंदी के लिए कुछ दिन पहले ही मुफ्ती शहजाद आलम की सरपरस्ती में उलमा-ए-कराम की बैठक हुई थी। इसी में निकाह में डीजे-बाजा पर पाबंदी का फैसला किया गया था।

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